Narendra Modi Speech: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण की दूसरी कड़ी में विद्यार्थियों को एक अहम और समयानुकूल सीख दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छात्रों को प्रौद्योगिकी का गुलाम नहीं बनना चाहिए, बल्कि टेक्नोलॉजी को अपनी क्षमता बढ़ाने का औज़ार बनाना चाहिए।
कोयंबटूर, रायपुर, गुवाहाटी और गुजरात के छात्रों से बातचीत में प्रधानमंत्री ने चिंता जताई कि आज कई बच्चे मोबाइल और टीवी स्क्रीन के बिना खाना तक नहीं खा पाते। (Narendra Modi Speech)उन्होंने कहा, यह संकेत है कि आप मोबाइल के गुलाम बन गए हैं। आपको दृढ़ संकल्प लेना होगा कि आप टेक्नोलॉजी को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे।
AI से डरें नहीं, उसे साथी बनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने उभरती तकनीकों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर छात्रों को सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एआई या स्मार्टफोन को सर्वोपरि नहीं बनाना चाहिए, बल्कि इन्हें अपने कौशल को निखारने और सीखने की गति बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।
परीक्षा सफलता का मंत्र
छात्रों को परीक्षा तनाव से बचने का व्यावहारिक उपाय बताते हुए प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करने और पर्याप्त नींद लेने पर ज़ोर दिया। उनका कहना था कि अच्छी तैयारी के बाद तनाव अपने आप कम हो जाता है और रात की अच्छी नींद दिनभर की ऊर्जा और खुशी की कुंजी है।
प्रधानमंत्री ने यह देखकर खुशी जताई कि 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्र भी विकसित भारत 2047 के सपने से जुड़े हुए हैं। उन्होंने विकसित देशों की अच्छी आदतें अपनाने की बात कही—जैसे लाल बत्ती पर इंजन बंद करना, भोजन की बर्बादी रोकना और अनुशासित जीवन जीना।
अपने छात्र जीवन को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी महान व्यक्ति की सफलता के पीछे उसकी मां और शिक्षक की अहम भूमिका होती है। उन्होंने स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली को भी जरूरी बताया।
नेतृत्व पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नेता बनने का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं होता। नेतृत्व की असली पहचान है—दस लोगों तक अपने विचार स्पष्ट और प्रभावी ढंग से पहुंचाने की क्षमता और पहल करने का साहस।
रिकॉर्ड बनाता संवाद
2018 में शुरू हुआ परीक्षा पे चर्चा आज देश का सबसे बड़ा शैक्षिक संवाद मंच बन चुका है। 2023 में जहां 38.8 लाख पंजीकरण थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3.53 करोड़ तक पहुंच गई। नौवें संस्करण में 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ इस कार्यक्रम ने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी तोड़ दिया।
नया संदेश साफ है: टेक्नोलॉजी से भागना नहीं है, बल्कि उसे समझदारी से अपनाकर खुद को बेहतर बनाना है—यही परीक्षा और जीवन दोनों में सफलता की कुंजी है।




























































