National Treasure: हैदराबाद। हैदराबाद के निज़ामों की 173 दुर्लभ और बेशकीमती ज्वेलरी एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में है। वजह है केंद्र सरकार का यह स्पष्ट रुख कि निकट भविष्य में इन आभूषणों की किसी भी तरह की सार्वजनिक प्रदर्शनी की फिलहाल कोई योजना नहीं है। इसके बाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इतिहासकारों, सांस्कृतिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाया है कि (National Treasure) क्या इन ऐतिहासिक धरोहरों को वर्षों तक RBI की तिजोरी में बंद रखना ही सही फैसला है?
तिजोरी में कैद इतिहास
निज़ामों की यह ज्वेलरी भारत की सबसे समृद्ध शाही विरासतों में गिनी जाती है। इनमें हीरे, पन्ने, मोती, माणिक, नीलम और सोने-चांदी से बने अद्वितीय आभूषण शामिल हैं। इस संग्रह का सबसे चर्चित रत्न है जैकब डायमंड, जिसे दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हीरा माना जाता है।
इन सभी 173 आभूषणों को साल 1995 से मुंबई स्थित भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हाई-सिक्योरिटी तिजोरी में रखा गया है। सरकार इन्हें राष्ट्रीय धरोहर मानती है और सुरक्षा कारणों से सीमित पहुंच में रखती है।
इस संग्रह में ताज, हार, बाजूबंद, झुमके, कंगन, कमरबंद, मुकुट और शाही आभूषणों की कई दुर्लभ शैलियां शामिल हैं। इनका निर्माण 18वीं से 20वीं सदी के बीच हुआ था और ये निज़ामों की शान, सत्ता और वैभव का प्रतीक रहे हैं।
250 करोड़ का ऐतिहासिक सौदा
जानकारी के मुताबिक, भारत सरकार ने वर्ष 1995 में इन सभी आभूषणों को निज़ाम ट्रस्ट से मात्र 250 करोड़ रुपये में खरीदा था। विशेषज्ञों के अनुसार, आज इनकी कीमत कई गुना अधिक हो सकती है। इसके बाद से ये गहने RBI की तिजोरी में उच्च सुरक्षा और बीमा कवर के साथ सुरक्षित रखे गए हैं।
प्रदर्शनी पर सरकार का रुख
निज़ामों की ज्वेलरी को 2001, 2007 और 2019 में सीमित अवधि के लिए दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया था। हर बार इन प्रदर्शनों को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
हाल ही में राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया गया, जहां केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने साफ किया कि फिलहाल केंद्र सरकार की इन आभूषणों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की कोई योजना नहीं है।
हैदराबाद में म्यूजियम की मांग
तेलंगाना के नेताओं और सांस्कृतिक संगठनों का मानना है कि यह विरासत हैदराबाद की पहचान से जुड़ी है, इसलिए इसे वहीं एक विशेष संग्रहालय में रखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे न सिर्फ इतिहास जीवंत होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
पेपरवेट बना था जैकब डायमंड
इतिहास से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा यह भी है कि कभी जैकब डायमंड को निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने पेपरवेट की तरह इस्तेमाल किया था। वही हीरा आज भारत की सबसे कीमती धरोहरों में गिना जाता है।
धरोहर का भविष्य क्या?
निज़ामों की ज्वेलरी सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि भारत के इतिहास, राजनीति और सांस्कृतिक वैभव की चमकदार गवाही है। सवाल अब भी कायम है—क्या आने वाले समय में यह शाही विरासत हैदराबाद के किसी संग्रहालय में आम लोगों के लिए सजीव होगी, या फिर RBI की तिजोरी में ही इतिहास बनकर बंद रहेगी?


































































