Next RSS Chief: नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अगले सरसंघचालक को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन इस बीच संघ ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि नेतृत्व चयन में जाति कोई मानदंड नहीं है। RSS की परंपरा के अनुसार, सरसंघचालक का चयन अनुभव, ( Next RSS Chief) संगठन के प्रति समर्पण और हिंदू पहचान के आधार पर होता है, न कि जातिगत समीकरणों पर।
चुनाव नहीं, परामर्श से होता है चयन
RSS में सरसंघचालक का चयन किसी चुनावी प्रक्रिया से नहीं होता। यह फैसला संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और लंबे समय से सक्रिय स्वयंसेवकों के व्यापक परामर्श से लिया जाता है। संघ के सूत्रों के अनुसार, इस प्रक्रिया में व्यक्ति की संगठनात्मक समझ, अनुशासन और विचारधारा के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता दी जाती है।
मोहन भागवत का स्पष्ट संदेश
हाल ही में सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस मुद्दे पर स्पष्ट कहा कि RSS का विस्तार कभी भी जाति के आधार पर नहीं हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ का काम भौगोलिक और सामाजिक सरोकारों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा है। भागवत के अनुसार, “सरसंघचालक वही बनता है जो संगठन के लिए स्वयं को पूरी तरह समर्पित कर चुका हो।”
ब्राह्मण वर्चस्व के आरोपों पर जवाब
भागवत का यह बयान उन आलोचनाओं के बीच आया है, जिनमें RSS के शीर्ष नेतृत्व में ब्राह्मणों के वर्चस्व की बात कही जाती रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ की कार्यप्रणाली राजनीतिक दलों जैसी नहीं है, जहां जातिगत संतुलन साधा जाता है। RSS में योग्यता, अनुभव और सेवा भाव ही नेतृत्व का रास्ता तय करते हैं।
अगला सरसंघचालक: अभी अनिश्चितता
फिलहाल यह साफ नहीं है कि अगला सरसंघचालक कौन होगा या किस सामाजिक पृष्ठभूमि से आएगा। लेकिन संघ के संकेत यही हैं कि भविष्य में भी RSS अपनी उसी परंपरा पर कायम रहेगा, जहां जाति नहीं, संगठन के लिए योगदान ही निर्णायक भूमिका निभाता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह संदेश ऐसे समय में अहम है जब देश की राजनीति में जाति आधारित विमर्श फिर से तेज हो रहा है। RSS का यह रुख संगठन को उस बहस से अलग खड़ा करता है।




























































