नए साल का पहला झटका! LPG सिलेंडर हुआ 111 रुपये महंगा, होटल-ढाबों से लेकर कारोबारियों तक बढ़ी चिंता

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 Commercial LPG Cylinder: साल 2025 को अलविदा कहकर जैसे ही देश ने 2026 में कदम रखा, वैसे ही आम लोगों और कारोबारियों को महंगाई का करारा झटका लगा। 1 जनवरी 2026 की सुबह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा कर दिया, जिससे होटल, ढाबे, छोटे व्यापारी और फूड इंडस्ट्री की चिंता बढ़ गई है।

नए साल की शुरुआत जहां जश्न और उम्मीदों से होती है, वहीं इस बार महंगाई ने पहली ही तारीख को लोगों की जेब पर सीधा असर डाल दिया। दिल्ली से मुंबई और कोलकाता से ( Commercial LPG Cylinder)चेन्नई तक कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगे हो गए हैं।

एक झटके में 111 रुपये तक बढ़े दाम

ऑयल कंपनियों ने 19 किलो वाले कॉमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में प्रति सिलेंडर 111 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। हालांकि राहत की बात यह है कि 14 किलो वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर की गई है, जब पहले से ही खाने-पीने की चीजों की कीमतें ऊंचाई पर हैं और छोटे कारोबार मुनाफे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

1 जनवरी 2026 से लागू हुए नए रेट

कॉमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू कर दिए गए हैं। अलग-अलग महानगरों में अब ये कीमतें इस प्रकार हैं:

  • दिल्ली: ₹1580.50 से बढ़कर ₹1691.50
  • कोलकाता: ₹1684 से बढ़कर ₹1795
  • मुंबई: ₹1531.50 से बढ़कर ₹1642.50
  • चेन्नई: ₹1739.50 से बढ़कर ₹1849.50

दिसंबर में मिली थी राहत, जनवरी में टूटी उम्मीद

दिलचस्प बात यह है कि महज एक महीने पहले, यानी 1 दिसंबर 2025 को ऑयल कंपनियों ने कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम घटाए थे। उस वक्त दिल्ली और कोलकाता में 10 रुपये, जबकि मुंबई और चेन्नई में 11 रुपये की कटौती की गई थी।

लेकिन नए साल की पहली तारीख को हुई इस बढ़ोतरी ने दिसंबर में मिली राहत को पूरी तरह खत्म कर दिया है।

होटल और छोटे कारोबारियों पर सीधा असर

कॉमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से सबसे ज्यादा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस पर पड़ने वाला है। जानकारों का मानना है कि अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं, जिसका बोझ आखिरकार आम ग्राहक पर ही पड़ेगा। नए साल के पहले ही दिन महंगाई का यह झटका सरकार और उपभोक्ताओं—दोनों के लिए चिंता का संकेत माना जा रहा है।

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