SP का गुस्सैल रवैया, सड़क पर बाइक सवार को लात मारने की कोशिश ने खोली पोलिस की असंवेदनशीलता

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Viral Video: मैसुरु (कर्नाटक)। सत्ता, सुरक्षा और संवेदनशीलता—इन तीनों के टकराव का एक चौंकाने वाला वीडियो कर्नाटक से सामने आया है। मैसुरु के पास सुत्तूर में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यक्रम के दौरान ट्रैफिक जाम से जूझ रहे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का गुस्सा कैमरे में कैद हो गया। वीडियो में मैसुरु के एसपी मल्लिकार्जुन बालादंडी एक बाइक सवार को लात मारने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

सीएम कार्यक्रम बना वजह, सड़कों पर मची अफरातफरी

रविवार दोपहर सुत्तूर में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग उमड़े, जिससे इलाके की संकरी सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री को जल्द ही मैसुरु लौटना था और इसी कारण पुलिस पर रास्ता खाली कराने का भारी दबाव था।

स्थिति को संभालने के लिए मैसुरु के एसपी मल्लिकार्जुन बालादंडी खुद सड़क पर उतर आए। वे हाथों से वाहनों को रोककर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान एक बाइक सवार कथित तौर पर लाइन तोड़कर आगे बढ़ने लगा, जिस पर एसपी का गुस्सा भड़क उठा।

बाइकर पर लात मारने की कोशिश, कैमरे में कैद हुआ पल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइकर को रोकते समय एसपी ने उसे लात मारने की कोशिश की। यह पूरी घटना पास खड़े लोगों ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर ली। वीडियो में साफ दिख रहा है कि अधिकारी गुस्से में बाइक सवार की ओर पैर बढ़ाते हैं, हालांकि कोई गंभीर चोट होने की पुष्टि नहीं हुई है।

वीडियो वायरल, पुलिस व्यवहार पर उठे सवाल

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस के व्यवहार और सत्ता से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान आम नागरिकों के साथ किए जाने वाले बर्ताव पर सवाल उठने लगे हैं। कई यूजर्स ने इसे “वर्दी की मर्यादा के खिलाफ” बताया, वहीं कुछ लोगों ने भारी दबाव में काम कर रहे अधिकारी की मजबूरी का तर्क भी दिया।

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कार्यक्रम के बाद अपने करीबी मित्र नरसेगौड़ा के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तुरंत रवाना हो रहे थे, जिससे समय का दबाव और बढ़ गया था। ऐसे में पुलिस को तंग सड़कों पर सुरक्षा और ट्रैफिक दोनों संभालने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

अब सवाल यही है…

क्या वीवीआईपी मूवमेंट के दबाव में आम लोगों के साथ सख्ती जायज़ है? या फिर वायरल वीडियो के बाद पुलिस प्रशासन को अपने अधिकारियों के व्यवहार पर आत्ममंथन करना पड़ेगा? फिलहाल, यह घटना कानून व्यवस्था से ज्यादा संवेदनशीलता और जवाबदेही की बहस छेड़ चुकी है।

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