इस अभियान की खास बात यह रही कि शुभारंभ के पहले ही दिन आयुक्त कार्यालय के समीप स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए गए, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। महिलाओं की यह सहभागिता न केवल योजना की स्वीकार्यता को दर्शाती है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति बढ़ते भरोसे और जागरूकता का भी संकेत देती है।
पहले दिन दिखा भरोसा, स्वास्थ्य को लेकर बदला नजरिया
स्क्रीनिंग शिविरों में महिलाओं ने स्वेच्छा से स्वास्थ्य जांच कराई। कई महिलाओं ने कहा कि इस तरह की मोबाइल और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उनके लिए बेहद उपयोगी हैं, क्योंकि इससे समय पर बीमारी की पहचान संभव हो पाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, निवारक जांच से गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकता है, जिससे इलाज आसान और कम खर्चीला होता है। ‘नमो शक्ति रथ’ इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है।

नागरिक समाज और प्रशासन का साझा प्रयास
वाराणसी में ‘नमो शक्ति रथ’ का विस्तार नागरिक समाज, स्थानीय प्रशासन और निर्वाचित नेतृत्व के बीच प्रभावी सहयोग का उदाहरण भी पेश करता है। यह पहल यह दर्शाती है कि जब सामाजिक संस्थाएं और प्रशासन मिलकर काम करते हैं, तो जनहित की योजनाएं तेजी से और प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचती हैं।
अभियान का मूल संदेश साफ है—स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार। निवारक स्वास्थ्य सेवाएं, समय पर जांच और सामुदायिक सहभागिता ही एक स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत की मजबूत नींव रख सकती हैं।

आगे और क्षेत्रों तक पहुंचाने की तैयारी
आईटीवी फाउंडेशन से जुड़े पदाधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस पहल का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं निवारक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकें।
वाराणसी में ‘नमो शक्ति रथ’ की शुरुआत ने यह संदेश दिया है कि जब स्वास्थ्य सेवाएं महिलाओं के दरवाजे तक पहुंचती हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से दिखाई देता है।





































































