मिसाइलों की गूंज, बंद एयरस्पेस और हाई अलर्ट….क्या यह संघर्ष अब क्षेत्रीय नहीं, वैश्विक होने जा रहा है?

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Iran Israel conflict

Iran Israel conflict: तेहरान/वॉशिंगटन/तेल अवीव: मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान में कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले की खबरों के बाद क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस सैन्य कार्रवाई को इजरायल ने ‘शील्ड ऑफ जुडा’ नाम दिया है।(Iran Israel conflict) हालांकि इन हमलों के पैमाने और नुकसान को लेकर स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बताए जा रहे हैं।

कथित रूप से सरकारी और रणनीतिक ठिकाने निशाने पर

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान में कई अहम सरकारी परिसरों के पास विस्फोटों की आवाज सुनी गई। कुछ रिपोर्ट्स में राष्ट्रपति भवन और रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास हमलों का दावा किया गया है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई को सुरक्षा कारणों से सुरक्षित स्थान पर ले जाने की भी खबरें हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि सीमित है।

तेहरान के अलावा कोम, तबरेज, करमनशाह और इस्फहान जैसे शहरों में भी अलर्ट जारी किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।

अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और क्षेत्रीय असर

रिपोर्ट्स में अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों और क्षेत्र में तैनात सैन्य संसाधनों के सक्रिय होने की बात कही गई है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने विस्तृत ऑपरेशनल विवरण साझा नहीं किया है, लेकिन वॉशिंगटन ने अपने नागरिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई है।

पड़ोसी देश इराक ने एहतियातन अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी क्षेत्र से गुजरने वाली उड़ानों के मार्ग बदल दिए हैं।

ईरान की जवाबी चेतावनी

ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकारी बयानों में कहा गया है कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया गया है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

वैश्विक बाजार और कूटनीतिक हलचल

तनाव बढ़ने के साथ ही वैश्विक तेल बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और तत्काल संवाद शुरू करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात काबू में नहीं आए, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

क्या आगे बढ़ेगा संघर्ष?

फिलहाल स्थिति तेजी से बदल रही है और जमीनी हालात को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र स्रोतों से सत्यापन का इंतजार है। कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं कि हालात को पूर्ण युद्ध में बदलने से रोका जा सके।

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