युद्धविराम लागू था, फिर गाजा में गोलियां क्यों चलीं? 5 महीने का शिशु भी मारा गया

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Gaza Violence

Gaza Violence: गाजा पट्टी में एक बार फिर युद्धविराम की उम्मीदों पर खून के छींटे पड़ गए हैं। इजरायली सेना की फायरिंग और शेलिंग में कम से कम 17 फ़िलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। अस्पताल अधिकारियों ने बुधवार को इस त्रासदी की पुष्टि की। (Gaza Violence)मरने वालों में पांच महीने का शिशु और महज़ 10 दिन की नवजात बच्ची भी शामिल है, जिसने इस हिंसा को और ज्यादा झकझोर देने वाला बना दिया।

अस्पतालों में मातम, सवालों में युद्धविराम

शिफा अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में सात महिलाएं और पांच बच्चे शामिल हैं। अस्पताल के निदेशक डॉ. मोहम्मद अबू सेलमिया ने फेसबुक पोस्ट में लिखा,“गाजा पट्टी में हमारे लोगों के खिलाफ नरसंहार जारी है। युद्धविराम कहाँ है? मध्यस्थ कहाँ हैं?”उनके शब्द गाजा के आम लोगों की उस पीड़ा को बयान करते हैं, जो हर हमले के बाद और गहरी होती जा रही है।

ये घटनाएं 10 अक्टूबर 2025 को लागू हुए युद्धविराम समझौते के बाद की हैं, जिसे अब तक कई घातक हमले झकझोर चुके हैं। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस युद्धविराम के लागू होने के बाद से अब तक 530 से ज्यादा फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है।

कहां-कहां हुईं जानलेवा घटनाएं

  • तुफ्फाह (उत्तर गाजा): इजरायली सेना ने एक इमारत पर गोलीबारी की, जिसमें कम से कम 11 लोग मारे गए। इनमें से अधिकतर एक ही परिवार के सदस्य बताए जा रहे हैं।
  • खान यूनिस (दक्षिण गाजा): एक परिवार के तंबू पर हमले में 3 लोगों की मौत हुई, जिनमें 12 साल का एक बच्चा भी शामिल है।
  • ज़ैतोउन (पूर्वी गाजा सिटी): टैंक शेलिंग में 3 और लोगों की जान गई, जिनमें एक पति-पत्नी शामिल थे।

इजरायल और हमास के दावे आमने-सामने

इजरायल का कहना है कि ये हमले उन लड़ाकों की गोलीबारी के जवाब में किए गए, जिसमें उसका एक सैनिक गंभीर रूप से घायल हुआ था। दूसरी ओर, हमास ने इन हमलों को युद्धविराम समझौते का सीधा उल्लंघन बताया है। मध्यस्थ देशों ने भी इन घटनाओं की निंदा की है, लेकिन जमीनी हालात में कोई राहत नजर नहीं आ रही।

गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक 71,800 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हो चुकी है। मंत्रालय यह स्पष्ट नहीं करता कि इनमें कितने लड़ाके थे और कितने आम नागरिक, लेकिन उसके आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा आम तौर पर विश्वसनीय माना जाता है।

हर नई मौत के साथ गाजा में यह सवाल और गहरा होता जा रहा है कि अगर युद्धविराम भी बच्चों और महिलाओं की जान नहीं बचा पा रहा, तो आम लोगों के लिए शांति आखिर कब आएगी?

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