Iran Warship: श्रीलंका के तट के निकट अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी से किए गए हमले के कारण डूबे ईरानी युद्धपोत पर कोई हथियार नहीं था. ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार (5 मार्च, 2026) को यह दावा किया.
उन्होंने जहाज को निशाना बनाये जाने को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया.(Iran Warship)ईरानी जहाज ‘आईरिस देना’ भारत की ओर से आयोजित मिलन बहुपक्षीय नौसैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था कि तभी बुधवार तड़के उस पर हमला हुआ.
अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है…
श्रीलंकाई अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविक मारे गए. ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि अयातुल्ला डॉ. अब्दुल मजीद हकीमेलाही ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘ईरानी जहाज को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है, क्योंकि उनके पास किसी भी प्रकार के हथियार नहीं थे.’
उन्होंने कहा, ‘वे (ईरानी नाविक) यहां अभ्यास के लिए आए थे. अभ्यास समाप्त होने के बाद वे ईरान वापस जाना चाहते थे और उन पर अमेरिका ने हमला कर दिया.’ हकीमेलाही ने कहा, ‘यह मानवता, नैतिकता और न्याय के विरुद्ध है.’ उन्होंने मौजूदा संघर्ष पर कहा कि ईरान अपना बचाव कर रहा है.
हकीमेलाही ने कहा, ‘हम अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे थे. ओमान में हमने सद्भावना से बातचीत की और हम बातचीत के लिए टिके रहे. हमने बातचीत नहीं छोड़ी, लेकिन बातचीत के दौरान ही उन्होंने (अमेरिका ने) हम पर हमला कर दिया.’
हमलों में बच्चों समेत सैकड़ों नागरिक
उन्होंने स्वीकार किया कि हाल ही में हुए अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों में कई कमांडर मारे गए. अधिकारी ने बताया कि इन हमलों में बच्चों समेत सैकड़ों नागरिक भी मारे गए हैं. हकीमेलाही ने कहा, ‘उन्होंने एक प्राथमिक विद्यालय पर हमला किया, जिसमें सात से 12 वर्ष की आयु के बच्चे मारे गए. कम से कम 173 छात्र मारे गए हैं.’
उन्होंने कहा, ‘इजरायल और अमेरिका ने ईरान के गांधी अस्पताल पर हमला किया और कई बच्चों व शिशुओं की जान ले ली. वे तेहरान और इस्फहान में भी हमारे नागरिकों को मार रहे हैं.’ हकीमेलाही ने कहा, ‘वे हमारे नागरिकों पर हमला कर रहे हैं लेकिन ईरानी जनता कभी भी अपमान सहन नहीं करेगी और वे खून की आखिरी बूंद तक लड़ेंगे.’

































































