मिडिल ईस्ट तनाव के बीच IRIS डेना संकट, ईरान ने भारत से मांगी सहायता…जानें पूरा मामला

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Iran warship crisis: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक अहम जानकारी सामने आई है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत IRIS डेना पर अमेरिकी हमले से कुछ दिन पहले ही ईरान ने भारत से अपने एक अन्य नौसैनिक जहाज को कोच्चि में लगाने की अनुमति मांगी थी.(Iran warship crisis) तकनीकी खराबी की वजह से यह जहाज भारतीय बंदरगाह पर शरण चाहता था.

 जहाज में तकनीकी समस्या

सरकारी सूत्रों के अनुसार ईरान ने 28 फरवरी 2026 को भारत से संपर्क कर अपने नौसैनिक जहाज IRIS लावन को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति मांगी थी. ईरान ने बताया था कि जहाज में तकनीकी समस्या आ गई है और उसे तत्काल बंदरगाह पर रुकने की जरूरत है. भारतीय अधिकारियों ने इस अनुरोध पर विचार करने के बाद 1 मार्च को जहाज को डॉकिंग की अनुमति दे दी.

4 मार्च को कोच्चि पहुंचा ईरानी जहाज

अनुमति मिलने के बाद ईरानी जहाज 4 मार्च को कोच्चि पहुंचा और वहां डॉक किया. यह जहाज उस समय क्षेत्र में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने आया था. सूत्रों के मुताबिक जहाज पर मौजूद 183 क्रू मेंबर्स को फिलहाल कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है.

 ईरान का युद्धपोत IRIS डेना

यह पूरा घटनाक्रम उस घटना से ठीक पहले हुआ जब ईरान का युद्धपोत IRIS डेना श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डूब गया. रिपोर्टों के अनुसार 4 मार्च को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया था, जिसमें कई ईरानी नौसैनिक मारे गए. यह जहाज भारत में आयोजित एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था जब उस पर हमला हुआ.

“कड़वा परिणाम”

इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समुद्र में गंभीर अपराध किया है और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना चेतावनी के हमला किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने ऐसा खतरनाक उदाहरण स्थापित किया है, जिसका उसे “कड़वा परिणाम” भुगतना पड़ेगा.

 श्रीलंका की नौसेना

हमले के बाद श्रीलंका ने बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान चलाया. श्रीलंका की नौसेना ने कई नाविकों को समुद्र से बचाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा दिसानायके ने कहा कि युद्ध में कभी किसी भी निर्दोष व्यक्ति की जान नहीं जानी चाहिए. इसलिए श्रीलंकाई सरकार ने जहाज पर मौजूद लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया.

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