Iran Protests: तेहरान। ईरान इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। अयातुल्ला अली खामनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई है। बीते 14 दिनों से लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं, जिनमें अब सिर्फ नारे नहीं बल्कि गोलियों की आवाज़ भी शामिल हो चुकी है।
टाइम मैगजीन के हवाले से डॉक्टरों और स्थानीय सूत्रों का दावा है कि तेहरान में प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं, जिसमें करीब 200 लोगों की मौत की खबर सामने आ रही है।(Iran Protests) हालांकि, सरकार की ओर से इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
तेहरान से उत्तर-पश्चिम तक फैली आग
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, ईरान में 7 जनवरी से विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए। राजधानी तेहरान, तबरीज, इस्फहान और उत्तर-पश्चिमी ईरान के कई शहरों में सड़कों पर गुस्सा साफ नजर आ रहा है।
पहले जहां प्रदर्शन सीमित इलाकों तक थे, अब ये राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुके हैं। सरकार ने हालात से निपटने के लिए कई इलाकों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की तैनाती तेज कर दी है।
अमेरिका पर ठीकरा, लेकिन सड़कों पर जनता
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई ने इन प्रदर्शनों के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि बाहरी ताकतें ईरान को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं।
हालांकि, सड़कों पर उतरे आम लोगों का गुस्सा यह संकेत दे रहा है कि नाराजगी सिर्फ बाहरी साजिश तक सीमित नहीं, बल्कि घरेलू हालात भी इसकी बड़ी वजह हैं।
इंटरनेट बंद, आवाजें खामोश करने की कोशिश
जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुए, सरकार ने इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक लोगों की पहुंच सीमित हो गई, जिससे प्रदर्शनकारियों की आवाज़ को दुनिया तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
मानवाधिकार उल्लंघन का दस्तावेजीकरण करने वाले संगठनों—ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी, ईरान ह्यूमन राइट्स और हेंगाव—के मुताबिक शुरुआती दिनों में मृतकों की संख्या 62 बताई गई थी। वहीं, कम से कम 2,300 लोगों की गिरफ्तारी की भी पुष्टि की गई है।
प्रदर्शन क्यों भड़के? जवाब जेब में छुपा है
ईरान की अर्थव्यवस्था बीते कई वर्षों से गंभीर दबाव में है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंध हैं, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं।
इसके अलावा, क्षेत्रीय तनावों ने हालात और बिगाड़ दिए। पिछले साल जून में इजरायल के साथ 12 दिनों की जंग ने ईरानी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी।
रियाल की गिरावट, महंगाई ने तोड़ी कमर
आर्थिक संकट का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ा है। 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग आधी गिर चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ दिसंबर महीने में महंगाई 42 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच गई।
पहले बाजारों और व्यापारियों ने रियाल के पतन के खिलाफ आवाज उठाई थी, लेकिन अब यह आंदोलन यूनिवर्सिटी कैंपस, छात्र, मजदूर और आम परिवारों तक फैल चुका है।
डर, गुस्सा और उम्मीद—ईरान की सड़कों की कहानी
ईरान की सड़कों पर इस वक्त सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि डर, गुस्सा और बदलाव की उम्मीद भी दिखाई दे रही है। सवाल यह है कि खामनेई सरकार इस उबाल को दबाने में सफल होती है या जनता की आवाज़ किसी बड़े बदलाव की ओर बढ़ती है।
फिलहाल इतना तय है कि ईरान में हालात सामान्य होने से काफी दूर हैं।




































































