न उबालना, न फिल्टर… इस भारतीय शहर में नल का पानी सुरक्षित, वजह जानकर चौंक जाएंगे

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Sujal Yojana

Sujal Yojana: देश के कई हिस्सों में आज भी साफ पीने का पानी लोगों के लिए संघर्ष बना हुआ है, लेकिन ओडिशा का पुरी शहर इस तस्वीर को बदल रहा है। यहां लोग बिना फिल्टर और बिना उबालें, सीधे घर में लगी टोंटी से ग्लास भरकर पानी पी रहे हैं। यह कोई सपना नहीं, बल्कि एक हकीकत है(Sujal Yojana)—पुरी अब भारत का पहला ‘ड्रिंक-फ्रॉम-टैप’ शहर बन चुका है।

“पहले डर लगता था, अब भरोसा है”

पुरी के लोकनाथ रोड की रहने वाली 55 वर्षीय सुशीला दास कहती हैं, “पहले बच्चों को नल का पानी पीने नहीं देते थे। उबालना पड़ता था या बोतल खरीदनी पड़ती थी। अब सीधे नल से पानी पीते हैं और मन में डर नहीं रहता।”

ऐसी ही राहत पुरी के हजारों परिवारों को मिली है, जहां हर दिन साफ पानी अब सुविधा नहीं, बल्कि अधिकार बन चुका है।

जहां बीमारी, वहीं पुरी की सीख

हाल ही में मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में दूषित पेयजल से कई मासूमों की मौत और दर्जनों लोगों के बीमार पड़ने की खबरें सामने आईं। ऐसे समय में पुरी की यह उपलब्धि बताती है कि अगर नीति और नीयत सही हो, तो जनस्वास्थ्य की तस्वीर बदली जा सकती है।

क्या है ‘ड्रिंक-फ्रॉम-टैप’ मिशन?

ओडिशा सरकार की ‘सुजल योजना’ के तहत शुरू किया गया Drink From Tap (DFT) मिशन हर घर को 24 घंटे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप शुद्ध पेयजल देने का प्रयास है। पुरी में इस योजना के तहत करीब 25 हजार घरों तक ऐसा पानी पहुंचाया गया है, जो WHO और BIS दोनों मानकों पर खरा उतरता है।

यहां नल का पानी पूरी तरह बैक्टीरिया-फ्री और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है। यही कारण है कि स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी अब बोतलबंद पानी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

तकनीक बनी भरोसे की रीढ़

पुरी की इस सफलता के पीछे आधुनिक वॉटर ट्रीटमेंट सिस्टम की बड़ी भूमिका है। पानी को कई चरणों में शुद्ध किया जाता है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं।

शहर में नई फूड-ग्रेड पाइपलाइनें बिछाई गई हैं, जो लीकेज रोकती हैं और बाहरी गंदगी को पानी में मिलने से बचाती हैं। साथ ही, रीयल-टाइम वॉटर क्वालिटी मॉनिटरिंग सेंसर किसी भी गड़बड़ी पर तुरंत अलर्ट जारी कर देते हैं।

पुरी में रहने वाले कई परिवार बताते हैं कि अब उनका खर्च भी कम हुआ है। बोतलबंद पानी पर होने वाला खर्च बचा है और बीमारियों का डर भी कम हुआ है। एक दुकानदार ने कहा, “पहले रोज पानी की बोतलें खरीदनी पड़ती थीं, अब वही पैसा बच्चों की पढ़ाई में लग रहा है।”

देश के लिए मॉडल बनता पुरी

पुरी की यह पहल सिर्फ एक शहर की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश है—साफ पानी सपना नहीं, सही योजना से हकीकत बन सकता है। अगर यह मॉडल दूसरे शहरों में अपनाया जाए, तो करोड़ों लोगों की सेहत और जिंदगी दोनों बदल सकती हैं।

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