Political Clash: राजस्थान की सियासत उस वक्त गरमा गई जब एक आधिकारिक सरकारी बैठक अचानक सियासी अखाड़े में बदल गई। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान दो सांसदों के बीच ऐसी तीखी बहस हुई कि मामला तू-तू मैं-मैं से (Political Clash)निकलकर धमकी तक जा पहुंचा।
सरकारी बैठक में सियासी टकराव
यह घटना 29 दिसंबर 2025 की है, जब डूंगरपुर जिला परिषद के ईडीपी सभागार में दिशा समिति की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक की अध्यक्षता बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत कर रहे थे। बैठक शुरू होते ही माहौल तब बिगड़ गया जब अध्यक्ष राजकुमार रोत ने एजेंडे से हटकर राज्य सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी। इस पर उदयपुर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने आपत्ति जताई।
“यह केंद्र की बैठक है, राज्य के मुद्दे नहीं”
भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि दिशा समिति की बैठक में केवल केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा की जाती है, राज्य सरकार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नियमों के खिलाफ है।
इस पर अध्यक्ष राजकुमार रोत ने पलटवार करते हुए कहा कि वह बैठक के अध्यक्ष हैं और क्षेत्र की जनता से जुड़े हर मुद्दे पर चर्चा करने का उन्हें अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि मन्नालाल रावत जानबूझकर बैठक का माहौल खराब कर रहे हैं।
15 मिनट तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
बहस के तेज होते ही भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने खुद को “धमकाया जाने वाला निर्वाचित जनप्रतिनिधि” बताया। इसी दौरान आसपुर से BAP विधायक उमेश डामोर भी बहस में कूद पड़े।
विधायक उमेश डामोर ने गुस्से में मन्नालाल रावत से कहा—
“लड़ाई करनी है तो बाहर आ जाओ, मैदान में खुलकर लड़ो।” यह नजारा करीब 15 मिनट तक चला, जिससे पूरे सभागार में तनाव का माहौल बन गया।
सुरक्षाकर्मियों ने संभाला मोर्चा
स्थिति बिगड़ते देख सुरक्षाकर्मियों और अन्य समिति सदस्यों ने बीच-बचाव किया। अधिकारियों की काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्ष शांत हुए, तब जाकर बैठक दोबारा शुरू हो सकी। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि विकास योजनाओं की समीक्षा के लिए बनी समिति भी अब सियासी टकराव से अछूती नहीं रही है। जनहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय नेताओं की आपसी खींचतान एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।































































