डॉलर सिर्फ करेंसी नहीं, बल्कि दुनिया को चलाने वाला सिस्टम कैसे बन गया, चौंकाने वाला सच

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Global Economic System

Global Economic System: अगर किसी एक मुद्रा ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है, तो वह है अमेरिकी डॉलर। यूरोप से लेकर एशिया, अफ्रीका से मिडिल ईस्ट तक—हर जगह डॉलर की जरूरत महसूस होती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार, विदेशी निवेश और तेल जैसे बड़े सौदे आज भी इसी करेंसी में तय होते हैं। (American Dollar Power) लेकिन सवाल यह है कि (Global Economic System) आखिर डॉलर ही क्यों पूरी दुनिया की सबसे अहम मुद्रा बना हुआ है?

दूसरे विश्व युद्ध के बाद शुरू हुई कहानी

डॉलर के वैश्विक दबदबे की नींव दूसरे विश्व युद्ध के बाद पड़ी। उस समय ज्यादातर देश आर्थिक तबाही से जूझ रहे थे, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में थी। अंतरराष्ट्रीय व्यापार को स्थिर करने के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई गई, जिसमें डॉलर को केंद्र में रखा गया। धीरे-धीरे दुनिया के देशों ने डॉलर को अपनाया और यह वैश्विक लेन-देन की पहचान बन गया।

एक लंबे समय तक डॉलर को सोने से जोड़ा गया था, जिससे उसकी विश्वसनीयता और मजबूत हुई। बाद में यह व्यवस्था बदली, लेकिन तब तक डॉलर दुनिया की आदत बन चुका था। आज भी अधिकांश देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर रखते हैं, क्योंकि संकट के समय यही सबसे भरोसेमंद और आसानी से इस्तेमाल होने वाली मुद्रा मानी जाती है।

फेडरल रिजर्व के फैसले क्यों हिलाते हैं दुनिया

डॉलर की दिशा तय करने में अमेरिका का केंद्रीय बैंक—फेडरल रिजर्व—सबसे अहम भूमिका निभाता है। ब्याज दरों में मामूली बदलाव भी वैश्विक बाजारों में हलचल मचा देता है। जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशक वहां पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं, जिससे डॉलर मजबूत होता है और दूसरी मुद्राओं पर दबाव आता है।

डॉलर की मजबूती के पीछे तेल व्यापार का बड़ा हाथ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल ज्यादातर डॉलर में खरीदा-बेचा जाता है। यानी किसी भी देश को तेल खरीदना हो, तो पहले डॉलर चाहिए। इस व्यवस्था ने डॉलर की मांग को हमेशा बनाए रखा है।

क्या डॉलर को मिल सकता है कोई चुनौती?

हाल के वर्षों में कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने की बात कर रहे हैं और लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि फिलहाल डॉलर का कोई मजबूत विकल्प मौजूद नहीं है। वैश्विक व्यापार और निवेश में उसकी हिस्सेदारी अब भी सबसे ज्यादा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका की अर्थव्यवस्था से ज्यादा उस भरोसे में है, जो दशकों में बना है। स्थिर नियम, मजबूत सिस्टम और विशाल बाजार ने डॉलर को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया है, जहां से उसे हटाना आसान नहीं। यही वजह है कि आज भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी डॉलर सबसे अहम भूमिका निभा रहा है।

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