गाजियाबाद की तीन बहनों की मौत: 20 घंटे मोबाइल, K-Pop और हॉरर गेम्स… डिजिटल दुनिया ने छीनी बचपन की सांस?

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Child Mental Health

Child Mental Health: गाजियाबाद। भारत सिटी इलाके में तीन नाबालिग बहनों की कथित आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि डिजिटल लत, ऑनलाइन फैंटेसी और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। (Child Mental Health)पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें दिन में लगभग 20 घंटे मोबाइल फोन पर बिताती थीं।

फोन डेटा ने खोले चौंकाने वाले राज

पुलिस को अहम सुराग उस मोबाइल फोन से मिला, जिसे बहनों के पिता ने उनकी मौत से करीब 15 दिन पहले एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान पर बेच दिया था। फोरेंसिक जांच में जो डेटा सामने आया, उसने जांच की दिशा ही बदल दी।

तीनों बहनें रोजाना औसतन 18–20 घंटे फोन इस्तेमाल करती थीं K-pop, कोरियन ड्रामा और एशियाई म्यूजिक कंटेंट सबसे ज्यादा देखा गया फोन में कई ऑनलाइन और हॉरर गेम्स इंस्टॉल थे YouTube हिस्ट्री में कोरियन, चीनी और जापानी गानों की लंबी प्लेलिस्ट मिली जांच अधिकारियों के अनुसार, सुसाइड नोट में जिन कंटेंट और गेम्स का जिक्र था, वही सब फोन में मौजूद पाया गया।

हॉरर गेम्स और मानसिक असर की जांच

फोन में Poppy Playtime, The Baby in Yellow, Ice Scream Man, Evil Nun और अन्य हॉरर गेम्स मिले। पुलिस का मानना है कि ऐसे गेम्स संवेदनशील बच्चों के मानसिक संतुलन पर असर डाल सकते हैं। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को एक रिपोर्ट भेजी गई है, जिसमें इन गेम्स की समीक्षा और संभावित नियमन की मांग की गई है।

कोविड के बाद बढ़ी डिजिटल निर्भरता

जांच में सामने आया कि कोविड महामारी के बाद तीनों बहनों ने स्कूल जाना लगभग बंद कर दिया था। सामाजिक दायरा सिमटता गया और उनका अधिकांश समय मोबाइल स्क्रीन पर गुजरने लगा।

साल 2025 में उन्होंने K-drama और कार्टून कैरेक्टर्स पर आधारित एक YouTube चैनल शुरू किया, जिसके 2,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए थे। लेकिन कथित आत्महत्या से करीब 10 दिन पहले यह चैनल डिलीट कर दिया गया।

क्या YouTube चैनल हटना बना बड़ा झटका?

पुलिस के मुताबिक, पिता ने कोरियन कल्चर के प्रति उनके बढ़ते जुनून पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद चैनल हटाया गया और मोबाइल की पहुंच भी सीमित की गई। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या डिजिटल दुनिया से अचानक कट जाना बच्चों के लिए मानसिक झटका साबित हुआ।

नई पहचान की तलाश या फैंटेसी में डूबना?

एक निजी ट्यूटर के अनुसार, तीनों बहनें खुद को मारिया, अलीज़ा और सिंडी जैसे कोरियन नामों से बुलवाती थीं। वे दावा करती थीं कि उन्हें कोरिया या चीन से गोद लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवहार गहरी ऑनलाइन पहचान और वास्तविक दुनिया से दूरी का संकेत हो सकता है।

बड़ा सवाल: बच्चों की डिजिटल सेहत कौन संभाले?

यह घटना माता-पिता, स्कूलों और सरकार के सामने एक अहम सवाल छोड़ती है—क्या हम बच्चों की डिजिटल आदतों और मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन टाइम मॉनिटरिंग, खुला संवाद और पेशेवर काउंसलिंग आज की जरूरत है।

अगर आपके आसपास कोई बच्चा मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो तुरंत परिवार, स्कूल या पेशेवर सलाहकार से संपर्क करें। समय रहते मदद मिलना बेहद जरूरी है।

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