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Saturday, February 21, 2026

दिल्ली ब्लास्ट की गुत्थी सुलझी: अदील के फोन ने कश्मीरी लड़कियों और खुफिया लेटर वाली हनीट्रैप साजिश खोली

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Delhi Blast

Delhi Blast: दिल्ली में हुए धमाके की जांच अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुँच चुकी है। हालिया गिरफ्तारी के बाद गिरफ्तारी किए गए व्हाइट‑कॉलर संदिग्ध डॉ. अदील अहमद राथर के मोबाइल फोन से मिली जानकारी ने जांच एजेंसियों को एक बड़े नेटवर्क की तरफ इशारा किया है। (Delhi Blast)फोन डेटा में सहारनपुर‑देवबंद‑दिल्ली‑जम्मू-कश्मीर कड़ी से जुड़े सैकड़ों संदिग्ध नंबर और कई ऐसे संपर्क मिले हैं जिनकी लोकेशन बार‑बार कश्मीर में पाई गई।

फोन डेटा से क्या संकेत मिले?

एजेंसियों ने फोन में दर्ज कॉन्टैक्ट्स और लोकेशन‑ट्रैक्स की क्रॉस‑वेरिफिकेशन की है। प्रारंभिक निष्कर्ष बताते हैं कि:

  • कॉन्टैक्ट्स में कई कश्मीरी छात्र और मदरसा‑छात्र शामिल हैं जो सहारनपुर, देवबंद और आस‑पास के हॉस्टल/रिहायश में रहते दिखाई दिए।
  • फोन में दर्ज कई महिलाओं के नंबरों की लोकेशन कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में दिखाई गई—जिसे लेकर जांच में हनीट्रैप एंगल भी सक्रिय किया गया है।
  • कई नंबरों की हाल‑फिलहाल की लोकेशन अनंतनाग, बांदीपोरा, श्रीनगर और पुलवामा तक मिली है—यह मॉड्यूल की संभावित गतिशीलता पर सवाल उठाता है।

कौन‑कौन सी कार्रवाई हो रही है?

यूपी एटीएस, जम्मू‑कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियाँ मिलकर फोरेंसिक, कॉल‑डाटा और लोकेशन वेरिफिकेशन कर रही हैं। जांच की विभिन्न श्रेणियों में शामिल हैं:

  • संपर्क सूची की पहचान और संदिग्ध व्यक्तियों की गिरफ्तारी/तपास।
  • हनीट्रैप एंगल की पड़ताल — क्या महिलाओं का किसी लक्षित रणनीति के लिए इस्तेमाल हुआ।
  • ट्रेड/व्यापारिक आवाजाही के जरिये किसी कश्मीर‑आधारित संपर्क का विश्लेषण।
  • देवबंद में पहले भेजे गए शिकायत पत्र की गहन समीक्षा और उस पर हुई कार्रवाई के रिकॉर्ड की पड़ताल।

देवबंद का पुराना पत्र और क्या सवाल उठता है?

जानकारी के अनुसार पहले देवबंद के एक युवक द्वारा गृह मंत्रालय और स्थानीय पुलिस को भेजा गया पत्र था जिसमें मेडिकल कॉलेज छात्रों, अजनबी युवाओं और बाहरी फंडिंग के संकेतों का जिक्र था। जांच अब यह देख रही है कि उस पत्र को समय रहते गंभीरता से लिया गया होता तो क्या यही नेटवर्क पहले ही उजागर हो सकता था।

स्थानीय सुरक्षा और जवाबदेही

सहारनपुर के एसएसपी आशीष तिवारी ने कहा कि जिला स्तर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और यूपी एटीएस तथा जम्मू‑कश्मीर पुलिस के साथ सूचनाएँ साझा की जा रही हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी नई इन्टेलिजेंस‑लिड सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर राठी ने कहा कि कॉलेज प्रशासन जांच में पूर्ण सहयोग कर रहा है और किसी भी तरह के संदिग्ध लोगों की पहचान के लिए आवश्यक दस्तावेज़ उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

जांच जारी है और अभी तक मिली जानकारी प्रारंभिक है—किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले विधिक प्रक्रिया और फोरेंसिक सत्यापन आवश्यक है। सुरक्षा एजेंसियाँ जनता से शांति बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील कर रही हैं।

 

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