विधानसभा में क्यों उठा मामला?
बूंदी से कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने प्रश्नकाल के दौरान कफ सिरप से हुई मौतों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। हालांकि, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इसे प्रश्नकाल से असंबंधित बताते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि एक भी बच्चे की मौत दुखद है, लेकिन नियमों के तहत विपक्ष चाहे तो इस मुद्दे को अलग तरीके से उठा सकता है।
टीकाराम जूली का तीखा सवाल
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह कफ सिरप निशुल्क दवा योजना के तहत वितरित किया गया था, इसलिए सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह बताए—सरकारी दवा से बच्चों की मौत क्यों हुई और कार्रवाई क्या की गई?
मंत्री का बड़ा दावा: “कफ सिरप से नहीं हुई मौत”
इसके जवाब में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सदन में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत कफ सिरप से नहीं बल्कि ओवरडोज की वजह से हुई।
“बच्चों के माता-पिता ने जो दवा बड़े बच्चों को दी जानी थी, वही दो साल से कम उम्र के बच्चों को दे दी। उस सिरप में कोडीन जैसे केमिकल होते हैं। ओवरडोज की वजह से मौत हुई,” — गजेंद्र सिंह खींवसर
को-मॉर्बिडिटी का भी जिक्र
मंत्री ने बताया कि मृतकों में से दो बच्चे पहले से दूसरी बीमारियों से ग्रसित थे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह कफ सिरप सरकारी डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब नहीं किया गया था और यह दवा पिछली कांग्रेस सरकार के समय से उपयोग में थी।
उन्होंने दो टूक कहा, “कोई भी मौत सीधे कफ सिरप से नहीं हुई है। सभी मामलों में ओवरडोज और को-मॉर्बिडिटी मुख्य कारण रहे हैं। हमारे पास पूरी जांच रिपोर्ट मौजूद है, जिसे माननीय सदस्यों को उपलब्ध कराया जाएगा।”
सवाल अब भी बरकरार
हालांकि मंत्री के जवाब के बाद भी विपक्ष संतुष्ट नजर नहीं आया। सवाल अब भी कायम है कि अगर दवा सरकारी योजना के तहत आई थी, तो उसकी मॉनिटरिंग और सही उपयोग को लेकर व्यवस्था क्यों नाकाम रही?





























































