गरीब, मजदूर और गांव के नाम पर राजनीति तेज, मनरेगा बचाओ अभियान ने बदला सियासी मूड

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MNREGA Controversy
MNREGA Controversy: जयपुरकेंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए ‘मनरेगा बचाओ अभियान’ की तैयारियां शुरू कर दी हैं. जयपुर में हुई अहम बैठक में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.

बैठक के दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा को गरीब, मजदूर और गांवों के लिए जीवनरेखा बताते हुए इसे कमजोर करने के आरोपों पर केंद्र और राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया.

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब सोनिया गांधी के नेतृत्व और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रयासों से मनरेगा कानून अस्तित्व में आया. इसका मकसद गांवों से पलायन रोकना, बंधुआ मजदूरी से मुक्ति दिलाना और ग्रामीणों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना था.उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ऐतिहासिक स्तर पर काम हुआ और करोड़ों गरीब परिवारों को सम्मानजनक रोजगार मिला.

 योजना खत्म करने पर ऐतराज

जूली ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले योजना का नाम बदलने का नाटक किया. “भगवान श्रीराम के नाम पर योजना का नाम रखा गया, हमें उससे कोई आपत्ति नहीं है,” लेकिन उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि योजना को ही कमजोर करना या खत्म करना गरीबों के पेट पर सीधी चोट है.

उन्होंने राजस्थान में ईआरसीपी योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि नाम चार-चार बार बदले गए, लेकिन असली सवाल योजना के क्रियान्वयन का है.

“अब मनरेगा का 40% खर्च राज्य पर”

मनरेगा की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि पहले राजस्थान सरकार का हिस्सा केवल 10 प्रतिशत होता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 40 फीसदी तक कर दिया गया है. उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य पहले से आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तो इतना बड़ा अतिरिक्त बोझ कहां से उठाया जाएगा.

उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर कटाक्ष करते हुए कहा, “जो खुद सरपंच रह चुका हो, उसे मनरेगा की अहमियत अच्छे से पता होनी चाहिए. इसके बावजूद जनता को गुमराह किया जा रहा है.”

जूली ने राजस्थान सरकार की आर्थिक स्थिति पर निशाना साधते हुए कहा कि आज हालात यह हैं कि पेंशन समय पर नहीं मिल रही, स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच रहीं और अस्पतालों में दवाइयों की कमी है.

उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में मनरेगा के लिए अतिरिक्त फंड कहां से आएगा और किस मद से कटौती की जाएगी.

ग्रामीण मुद्दों पर तेज होगी सियासत

कांग्रेस नेताओं ने साफ संकेत दिए कि मनरेगा बचाओ अभियान के जरिए पार्टी गांव-गांव तक जाएगी और भाजपा सरकार की नीतियों को जनता के सामने उजागर करेगी. आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में मनरेगा को लेकर सियासी तापमान और बढ़ने के आसार हैं.

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