Budget 2026 Impact…गोल्ड बॉन्ड अब सुरक्षित दिखते हैं, लेकिन टैक्स से रिटर्न घट सकता है!

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Budget 2026 Impact

Budget 2026 Impact: नई दिल्ली: बजट 2026 पेश हो चुका है. टैक्स स्लैब में कोई बदलाव न होने जैसी कुछ घोषणाएं पहले से तय मानी जा रही थीं, लेकिन इस बजट में कुछ फैसले ऐसे भी रहे, जिन्होंने निवेशकों के जज़्बात पूरी तरह बदल दिए.

बीते दो दिनों से शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है और इसी बीच सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) को लेकर किया गया एक ऐलान निवेशकों के लिए बड़ा (Budget 2026 Impact) झटका साबित हो सकता है. खासतौर पर उन लोगों के लिए, जो SGB को टैक्स-फ्री रिटर्न का सुरक्षित जरिया मानते थे.

क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB सोने में निवेश का एक सरकारी विकल्प है. इसे भारत सरकार की ओर से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) जारी करता है. एक SGB की कीमत 1 ग्राम 24 कैरेट सोने के बराबर होती है और इसकी वैल्यू सोने के बाजार भाव के साथ बढ़ती-घटती रहती है.

यह उन निवेशकों के लिए पसंदीदा विकल्प रहा है, जो फिजिकल गोल्ड खरीदने की झंझट से बचना चाहते हैं. इसमें न तो चोरी का डर होता है और न ही स्टोरेज की चिंता. SGB एक सर्टिफिकेट के रूप में आपके डीमैट अकाउंट में सुरक्षित रहता है.

निवेशक इसे RBI के इश्यू के दौरान सीधे खरीद सकते हैं या फिर सेकेंडरी मार्केट यानी शेयर बाजार से भी ले सकते हैं.

SGB क्यों माना जाता था निवेशकों का फेवरेट?

SGB को फिजिकल गोल्ड से बेहतर इसलिए माना जाता रहा है क्योंकि इसमें दोहरा फायदा मिलता है. पहला, सोने की कीमत बढ़ने से बॉन्ड की वैल्यू बढ़ती है और दूसरा, सरकार की ओर से सालाना 2.5 प्रतिशत का फिक्स्ड ब्याज भी मिलता है.

हालांकि, इस ब्याज पर टैक्स लगता है और यह निवेशक की सालाना आय में जुड़ता है, लेकिन असली आकर्षण कैपिटल गेन टैक्स से जुड़ी छूट थी.

अब तक SGB पर टैक्स के क्या नियम थे?

अब तक नियम यह था कि अगर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी तक रखा जाए, तो उस पर मिलने वाले कैपिटल गेन पर कोई टैक्स नहीं लगता था. चाहे SGB सीधे RBI से खरीदा गया हो या सेकेंडरी मार्केट से.

इसी वजह से कई निवेशक ओरिजिनल इश्यू में मौका चूकने के बाद शेयर बाजार से SGB खरीदकर उसे मैच्योरिटी तक होल्ड करते थे और टैक्स-फ्री गेन का फायदा उठाते थे.

अगर कोई निवेशक SGB को बीच में बेचता था, तो टैक्स के नियम लागू होते थे. बजट 2024 में यह साफ किया गया था कि 12 महीने से कम समय में बेचने पर लाभ आपकी सालाना आय में जुड़ेगा, जबकि 12 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा.

Budget 2026 में ऐसा क्या बदला, जिससे बढ़ी चिंता?

Budget 2026 में SGB को लेकर किए गए नए ऐलान ने निवेशकों की उस धारणा को तोड़ दिया है कि यह हमेशा टैक्स-फ्री और पूरी तरह सुरक्षित विकल्प रहेगा.

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस फैसले का असर उन निवेशकों पर ज्यादा पड़ेगा, जिन्होंने SGB को लॉन्ग टर्म टैक्स प्लानिंग के नजरिए से चुना था.

शेयर बाजार में जारी गिरावट और SGB से जुड़े नियमों में बदलाव ने साफ कर दिया है कि अब निवेशकों को हर विकल्प को नए सिरे से समझना और रणनीति बदलना जरूरी हो गया है.

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