Indian Diplomats: नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए भारत सरकार ने बड़ा एहतियाती फैसला लिया है। संसदीय चुनाव से कुछ ही सप्ताह पहले भारत ने वहां तैनात अपने राजनयिकों और अधिकारियों के परिवारों को वापस बुलाने का निर्णय लिया है।(Indian Diplomats) यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और चरमपंथी गतिविधियों को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
सुरक्षा कारणों से लौटेंगे अधिकारियों के परिवार
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, भारत ने ढाका स्थित उच्चायोग और अन्य भारतीय मिशनों में तैनात अधिकारियों के आश्रितों को भारत लौटने की सलाह दी है। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि बांग्लादेश में भारत के सभी राजनयिक मिशन पूरी तरह कार्यरत हैं और किसी भी तरह की कूटनीतिक गतिविधि प्रभावित नहीं होगी।
ढाका के अलावा चटगांव, खुलना, राजशाही और सिलहट में भी भारतीय अधिकारी तैनात हैं। फिलहाल यह जानकारी सामने नहीं आई है कि अधिकारियों के परिवार किस तारीख तक भारत लौटेंगे।
‘गैर-पारिवारिक’ देश घोषित करने का संकेत
सूत्रों का कहना है कि बांग्लादेश में बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों और सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारत ने इसे अपने राजनयिकों के लिए ‘गैर-पारिवारिक गंतव्य’ बनाने का निर्णय लिया है। इससे पहले पाकिस्तान को भी इसी श्रेणी में रखा जा चुका है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में बढ़ता तनाव
अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में लगातार तनाव देखने को मिल रहा है। भारत ने कई मौकों पर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है।
गंगा जल समझौते पर भी तेज हुई हलचल
इसी बीच भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे से जुड़े 1996 के समझौते को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। यह समझौता 12 दिसंबर 2026 को समाप्त होने वाला है।
जल शक्ति मंत्रालय के तहत गठित एक आंतरिक समिति की रिपोर्ट में शुष्क मौसम के दौरान बिहार को लगभग 900 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। इस पानी का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जाएगा, जिसे बिहार के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
चुनाव, सुरक्षा और कूटनीति—तीनों मोर्चों पर परीक्षा
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में चुनावी माहौल, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां और भारत के रणनीतिक हित—तीनों इस फैसले से जुड़े हुए हैं। परिवारों की वापसी भले ही एहतियाती कदम हो, लेकिन यह क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में बदलते समीकरणों की ओर भी इशारा करता है।


































































