Ashok Gehlot : जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बाड़मेर और बालोतरा जिलों की प्रशासनिक सीमाओं में किए गए बदलाव को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। गहलोत ने इस फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए कहा कि यह निर्णय न तो (Ashok Gehlot) प्रशासनिक रूप से तर्कसंगत है और न ही आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
“जनता को राहत नहीं, उल्टा बढ़ी परेशानियां”
गहलोत ने कहा कि बायतु को बाड़मेर जिले में और गुड़ामालानी व धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में शामिल करना पूरी तरह अतार्किक है। इस बदलाव से गुड़ामालानी क्षेत्र के लोगों के लिए जिला मुख्यालय की दूरी घटने के बजाय और अधिक बढ़ गई है, जो सीधे तौर पर आमजन के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला जनता की सहूलियत नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
31 दिसंबर की अधिसूचना से मचा सियासी बवाल
गौरतलब है कि 31 दिसंबर को जारी अधिसूचना में बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में बदलाव किया गया, जो शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इस फैसले के बाद कुछ इलाकों में खुशी का माहौल है, तो कई क्षेत्रों में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।
कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 7 अगस्त 2023 को बालोतरा को नया जिला बनाए जाने की अधिसूचना जारी हुई थी। संशोधन के बाद अब बालोतरा जिले में 5 उपखंड, 9 तहसील और 5 उपतहसील होंगी।
किन क्षेत्रों में हुआ बदलाव?
- गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को बालोतरा जिले में शामिल किया गया
- बायतु उपखंड को बाड़मेर जिले में रखा गया
- बायतु की दो तहसीलें – गिड़ा और पाटोदी – बालोतरा जिले में शामिल की गईं
भाजपा सिर्फ सियासी फायदे देख रही
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछली सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने के उद्देश्य से नए जिलों का गठन किया था। लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं की अनदेखी कर केवल सियासी फायदे साधने में लगी हुई है।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार ‘सियासी रोटियां सेकने’ में व्यस्त है और यह फैसला पूरी तरह जनविरोधी है। गहलोत ने इस निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए संकेत दिया कि इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज हो सकता है।




































































