एयरस्ट्राइक के बाद क्या जंग की उलटी गिनती शुरू? अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बड़ा टकराव!

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Afghanistan Pakistan Tension

Afghanistan Pakistan Tension: काबुल/इस्लामाबाद। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से simmer कर रहा सीमा तनाव अब खुले टकराव की दहलीज पर पहुंच गया है। पाकिस्तान द्वारा अफगान सीमा के भीतर की गई एयरस्ट्राइक के बाद तालिबान ने साफ संकेत दिया है कि जवाब “सैन्य” होगा। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को झकझोर दिया है, बल्कि 2600 किलोमीटर लंबी सीमा पर रहने (Afghanistan Pakistan Tension) वाले लाखों लोगों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

“शर्मनाक हरकत का सैन्य जवाब”

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि “इसका जवाब कुदरती तौर पर सैन्य ही होगा।” हालांकि संभावित ऑपरेशन की बारीकियों पर उन्होंने चुप्पी साधी, लेकिन इतना स्पष्ट कर दिया कि “पाकिस्तान को उसके किए का फल भुगतना पड़ेगा।”

 “सात आतंकी ठिकाने तबाह”

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार के मुताबिक रविवार रात नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में की गई एयरस्ट्राइक खुफिया जानकारी के आधार पर थी। उनका कहना है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकी गुटों के सात ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान का आरोप है कि रमजान के बाद से देश में हुए कई आतंकी हमलों की योजना अफगान जमीन से बनाई गई थी।

हालांकि तालिबान सरकार लगातार इस आरोप से इनकार करती रही है कि उसकी जमीन किसी तीसरे देश के खिलाफ इस्तेमाल हो रही है।

नागरिक मौतों पर गहराया विवाद

सबसे बड़ा विवाद हताहतों को लेकर है। पाकिस्तान जहां इसे “सर्जिकल स्ट्राइक” बता रहा है, वहीं तालिबान का आरोप है कि रिहायशी इलाकों और स्कूलों को निशाना बनाया गया। मुजाहिद के अनुसार नंगरहार में एक ही परिवार के 17 लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे। पक्तिका में एक स्कूल को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।

अगर इन दावों की स्वतंत्र जांच होती है और नागरिक हताहतों की पुष्टि होती है, तो यह मामला अंतरराष्ट्रीय मंचों तक जा सकता है।

सीमा पर सीधी गोलीबारी, हालात नाजुक

हवाई हमलों के बाद सीमा पर तनाव और बढ़ गया। तोरखम और तीराह सेक्टर में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए और गोलीबारी की खबरें सामने आईं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पहले फायरिंग का आरोप लगा रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि किसी भी “उकसावे वाली कार्रवाई” का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

 क्या यह सिर्फ सुरक्षा मुद्दा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव केवल सीमा सुरक्षा का मामला नहीं है। पाकिस्तान के भीतर बढ़ते आतंकी हमलों, आर्थिक दबाव और राजनीतिक अस्थिरता के बीच यह कार्रवाई एक रणनीतिक संदेश भी हो सकती है। वहीं तालिबान अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिश में है और किसी भी तरह की कमजोरी दिखाना उसके लिए मुश्किल हो सकता है।

अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। फिलहाल सवाल यही है — क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर लौटेंगे, या सीमा पर बारूद की गंध और तेज होगी?

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