क्या सच में प्यासा रह जाएगा पाकिस्तान? रावी पर भारत का गुप्त प्लान…जानें मामला

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Ravi River News

Ravi River News: नई दिल्ली/जम्मू। सीमापार आतंकवाद और कूटनीतिक तनाव के बीच भारत ने जल प्रबंधन के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है। रावी नदी का वह पानी, जो अब तक बिना उपयोग पाकिस्तान की ओर बह जाता था, अब भारत के खेतों को सींचेगा। (Ravi River News) यह बदलाव शाहपुर कंडी डैम के चालू होने के साथ संभव होगा।

मार्च 2026 तक पूरी तरह चालू होने की तैयारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, शाहपुर कंडी डैम का निर्माण अंतिम चरण में है और इसे मार्च 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है। परियोजना शुरू होते ही रावी का पानी नियंत्रित ढंग से जम्मू-कश्मीर और पंजाब के हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा।

इससे जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के लिए नियमित पानी मिल सकेगा। पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में भी हजारों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

पहले क्यों बह जाता था पानी?

रावी नदी उन नदियों में शामिल है जिन पर भारत का अधिकार है, लेकिन दशकों तक पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में बड़ी मात्रा में पानी पाकिस्तान की ओर बह जाता था। जल भंडारण और वितरण की मजबूत व्यवस्था न होने से भारत अपने हिस्से का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा था।

शाहपुर कंडी डैम के जरिए अब इस पानी को रोका और नियंत्रित किया जाएगा, जिससे सिंचाई नेटवर्क को मजबूती मिलेगी।

खेती से विकास तक

विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से न केवल फसल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी बड़ा बदलाव आएगा। भविष्य में इससे बिजली उत्पादन की संभावनाएं भी तलाश की जा सकती हैं।

स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए यह परियोजना बड़ी राहत साबित हो सकती है।

रणनीतिक और आर्थिक संदेश

भारत का यह कदम केवल जल प्रबंधन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे रणनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। अपने हिस्से के जल संसाधनों का पूरा उपयोग कर भारत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब संसाधनों के प्रबंधन में लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मार्च 2026 तक परियोजना समय पर पूरी होती है या नहीं, क्योंकि इसके चालू होते ही सीमावर्ती इलाकों की खेती और जल व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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