Rajasthan Crime News: जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर स्थित पाल के आरती नगर आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत ने पुलिस और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को उलझा कर रख दिया है। 28 जनवरी को हुई इस रहस्यमय घटना में अब इंजेक्शन और दाल—ये दो बिंदु जांच के केंद्र में आ गए हैं। ( Rajasthan Crime News)हालात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर खुद मौके पर पहुंचे और मामले की जांच के लिए SIT का गठन कर दिया गया है।
मौत से पहले क्या हुआ था?
पुलिस और गवाहों के बयानों के मुताबिक, 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत खराब थी। उन्हें जुकाम और गला खराब होने की शिकायत थी। इसी दौरान आश्रम में मौजूद कम्पाउंडर देवीसिंह राजपुरोहित ने उन्हें दो इंजेक्शन लगाए।
इंजेक्शन लगने के कुछ समय बाद साध्वी ने अपने कर्मचारी सुरेश से दाल बनवाने को कहा। आमतौर पर रोजाना सुरेश ही खाना कमरे में लेकर जाता था, लेकिन उस दिन साध्वी के पिता बिरमनाथ खुद दाल लेकर कमरे में गए।
बताया जा रहा है कि दाल पीने के कुछ ही देर बाद साध्वी की हालत अचानक बिगड़ गई। वे घबराकर चिल्लाने लगीं कि “सांस नहीं आ रही” और देखते ही देखते उनकी तबीयत बेहद नाजुक हो गई।
जांच के दो बड़े एंगल: जहर या इंजेक्शन रिएक्शन?
पुलिस इस पूरे मामले को दो अहम थ्योरी पर जांच रही है:
- इंजेक्शन का रिएक्शन: क्या लगाए गए इंजेक्शन गलत थे या किसी दवा का घातक साइड इफेक्ट हुआ?
- जहरीली दाल: क्या दाल में कोई जहरीला पदार्थ मिलाया गया था?
एफएसएल (FSL) टीम ने आश्रम से दाल बनाने में इस्तेमाल की गई सामग्री और बर्तनों के सैंपल जब्त कर लिए हैं।
क्या सबूत मिटाने की कोशिश हुई?
मामले में सबसे सनसनीखेज जानकारी यह सामने आई है कि मौत से पहले साध्वी के मुंह से झाग निकले थे। विशेषज्ञों के अनुसार, झाग निकलना अक्सर जहर के लक्षणों में गिना जाता है।
सूत्रों का दावा है कि ये झाग तुरंत साफ कर दिए गए। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि झाग किसने और क्यों साफ किए। अगर ऐसा जानबूझकर किया गया, तो यह सबूत मिटाने की गंभीर कोशिश मानी जाएगी।
SIT की कार्रवाई और पुलिस जांच
विसरा जांच: मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रखकर एफएसएल भेज दिया गया है। हिस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट से ही यह साफ होगा कि शरीर में कौन-सा तत्व गया था।
पिता से पूछताछ: साध्वी को उनके पैतृक गांव जास्ती (बालोतरा) में समाधि दी जा चुकी है। इसके बाद SIT ने उनके पिता बिरमनाथ को एसीपी कार्यालय बुलाकर लंबी पूछताछ की।
कमिश्नर की निगरानी: पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने साफ कहा है कि मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सबकी नजर रिपोर्ट पर
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई एफएसएल और विसरा रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यह साफ होने के बाद ही तय होगा कि साध्वी प्रेम बाईसा की मौत मेडिकल लापरवाही, जहर या किसी साजिश का नतीजा थी।
सवाल अब भी वही है—आश्रम में उस दिन ऐसा क्या हुआ, जिसने एक चर्चित साध्वी की जान ले ली?





























































