महिला अधिकारी को धमकी देने का मामला: कांग्रेस नेता राजीव गौड़ा पर गिरी गाज, जानिए पूरा घटनाक्रम

4
 Karnataka Congress News

Karnataka Congress News: बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त बड़ा संदेश गया, जब सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अपने ही सीनियर नेता राजीव गौड़ा को पार्टी से निलंबित कर दिया। मामला शिदलाघट्टा की नगर आयुक्त अमृता गौड़ा को फोन पर गाली देने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी से जुड़ा है। यह कदम सिर्फ एक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि सत्ता में रहते हुए भाषा ( Karnataka Congress News)और व्यवहार की सीमाओं पर सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

बैनर हटाने पर भड़का विवाद

नगर आयुक्त अमृता गौड़ा ने शिकायत में आरोप लगाया था कि उनकी तस्वीर वाला बैनर हटाए जाने से नाराज़ होकर राजीव गौड़ा ने उन्हें फोन पर अपशब्द कहे और धमकाया। शिकायत के आधार पर 14 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद यह मामला तेजी से तूल पकड़ता चला गया।

कांग्रेस अनुशासन समिति का सख्त फैसला

कांग्रेस राज्य अनुशासन समिति के अध्यक्ष के. रहमान खान ने निलंबन आदेश जारी करते हुए कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए राजीव गौड़ा को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित किया जाता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि घटना के 10 दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस उन्हें तलाश नहीं कर पाई है और वे फरार बताए जा रहे हैं।

KPCC की सिफारिश के बाद बढ़ी कार्रवाई

कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) ने 21 जनवरी को ही निलंबन की सिफारिश कर दी थी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस विवाद के चलते कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर भी आलोचना का सामना करना पड़ा। डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने पहले ही संकेत दे दिया था कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।

करीबी होने के बावजूद नहीं मिली राहत

राजीव गौड़ा को खाद्य मंत्री के.एच. मुनियप्पा और डीके शिवकुमार का करीबी माना जाता है। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में सिदलाघट्टा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव भी लड़ा था। बावजूद इसके, पार्टी ने यह साफ कर दिया कि व्यक्तिगत समीकरण अनुशासन से ऊपर नहीं हैं।

राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष (प्रशासन) जी.सी. चंद्रशेखर ने अनुशासन समिति को लिखे पत्र में कहा कि राजीव गौड़ा के बयान मीडिया में व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे पार्टी और उसके नेतृत्व को शर्मिंदगी उठानी पड़ी।

हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

इस मामले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी तीखा रुख अपनाया है। एफआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की बेंच ने सख्त शब्दों में कहा,

“क्या याचिकाकर्ता को महिलाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है? इस तरह की भाषा कैसे इस्तेमाल की जा सकती है? बोले गए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। एक अनियंत्रित ज़ुबान सब कुछ बर्बाद कर सकती है।”

राजनीति में भाषा की मर्यादा पर सवाल

यह पूरा मामला सिर्फ एक नेता की व्यक्तिगत गलती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीति में महिला अधिकारियों की सुरक्षा, सत्ता के दुरुपयोग और सार्वजनिक भाषा की मर्यादा जैसे बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस का यह फैसला आने वाले समय में अन्य दलों के लिए भी एक नज़ीर माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here