Rajasthan Vote Theft Row: जयपुर: राजस्थान की राजनीति में वोटर लिस्ट को लेकर सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेशभर में कांग्रेस समर्थकों के नाम मतदाता सूची से कटवाने की (Rajasthan Vote Theft Row)सुनियोजित साजिश चल रही है। गहलोत ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है।
‘फॉर्म 7’ के जरिए खेल होने का दावा
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के तहत नाम कटवाने के लिए आपत्ति दर्ज करने का आज आखिरी दिन है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई इलाकों से सूचना मिल रही है कि अज्ञात लोग बड़ी संख्या में ‘फॉर्म 7’ जमा कर कांग्रेस समर्थकों के नाम हटवाने की कोशिश कर रहे हैं।
कार्यकर्ताओं को ‘एक्शन मोड’ में आने का निर्देश
पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं और बूथ लेवल अध्यक्षों (BLA) से अपील की है कि वे पूरी सतर्कता के साथ इस प्रक्रिया पर नजर रखें। उन्होंने कहा कि “किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटना नहीं चाहिए। यह केवल राजनीति नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का सवाल है।”
प्रशासन को सख्त चेतावनी, संविधान की याद दिलाई
गहलोत ने प्रशासनिक अधिकारियों को भी दो-टूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी राजनीतिक दबाव में न आएं और केवल संविधान के अनुसार काम करें। उन्होंने कहा, “BJP की बौखलाहट साफ दिख रही है। अगर कोई अधिकारी गैरकानूनी काम में शामिल पाया गया, तो उसे एक दिन कानून का सामना करना ही पड़ेगा।”
डोटासरा का दावा
इस मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी सनसनीखेज दावा किया है। बीकानेर-धोरीमना में उन्होंने कहा कि अमित शाह और बीएल संतोष के जयपुर दौरे के बाद एक रणनीति के तहत कांग्रेस समर्थकों के वोट काटे जा रहे हैं।
डोटासरा का आरोप है कि मुख्यमंत्री आवास (CMR) से एक विशेष पेन ड्राइव जारी की गई है, जिसमें प्रदेश की हर विधानसभा से 4 से 5 हजार कांग्रेस समर्थित वोट काटने का डेटा मौजूद है। यानी पूरे राजस्थान में करीब 5 लाख वोट काटने का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
कांग्रेस नेताओं के इन आरोपों के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वोटर लिस्ट को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक तापमान और बढ़ा सकता है। अब सबकी नजर प्रशासन की भूमिका और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर टिकी है।





































































