BJP Strategy: नई दिल्ली। नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने अपने राजनीतिक कार्यक्रमों को तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन के सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी का राष्ट्रीय अधिवेशन फरवरी के मध्य में आयोजित किया जा सकता है, जिसके लिए दिल्ली स्थित भारत मंडपम को एक बार फिर संभावित स्थल माना जा रहा है। यह अधिवेशन संसद के बजट सत्र के दो चरणों के बीच मिलने वाले ब्रेक के दौरान आयोजित हो सकता है।
बजट सत्र के चलते सांसदों की पहले से दिल्ली में मौजूदगी को देखते हुए पार्टी नेतृत्व इस समय को अधिवेशन के लिए सबसे मुफ़ीद मान रहा है। इसके साथ ही 27 फरवरी के आसपास पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान की संभावना है, ऐसे में बीजेपी चाहती है कि उससे पहले यह बड़ा संगठनात्मक कार्यक्रम संपन्न कर लिया जाए।
अधिवेशन से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव!
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव अधिवेशन से पहले ही पूरा कराने की तैयारी में है। ऐसे में मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ माना जा रहा है। अधिवेशन में उनके नाम पर केवल औपचारिक अनुमोदन किया जाएगा। यह कदम पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हालांकि राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के ज्वलंत मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए जाने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार पार्टी की प्राथमिकता नीतिगत बहस से ज्यादा राजनीतिक एजेंडा तय करने पर केंद्रित दिखाई दे रही है। सूत्रों का कहना है कि इस मंच के जरिए विपक्ष शासित राज्यों के खिलाफ पार्टी अपने नैरेटिव को और धार दे सकती है।
चुनावी राज्यों पर खास रणनीति
राष्ट्रीय अधिवेशन में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों को लेकर विशेष संकल्प लाए जाने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और तुष्टीकरण, जबकि तमिलनाडु में सनातन विरोध जैसे मुद्दों को अधिवेशन के प्रस्तावों में प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है। इन राज्यों को लेकर बीजेपी ज्यादा आक्रामक राजनीतिक रणनीति अपनाने के संकेत दे रही है।
इस राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी का शीर्ष नेतृत्व, राष्ट्रीय व प्रदेश परिषद के सदस्य, सांसद, विधायक, मेयर, जिलाध्यक्ष और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा पार्टी के विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। कुल मिलाकर 2500 से अधिक नेता और कार्यकर्ता इस अधिवेशन में हिस्सा लेंगे।
2026 की चुनावी लड़ाई का रोडमैप
नए साल में बीजेपी के सामने संगठनात्मक चुनौतियां और आने वाले चुनावों का दबाव दोनों हैं। ऐसे में फरवरी में होने वाला यह राष्ट्रीय अधिवेशन न सिर्फ पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति को स्पष्ट करेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं और नेताओं को जीत का मंत्र देने वाला अहम पड़ाव भी साबित हो सकता है।































































