Rajasthan News: राजस्थान में एक बार फिर इतिहास, सम्मान और राजनीति आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। महाराणा प्रताप से जुड़े एक बयान के बाद प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं पंजाब के राज्यपाल और राजस्थान के वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया, जिनके बयान को लेकर क्षत्रिय करणी सेना ने कड़ा ऐतराज जताया है।(Rajasthan News) सोशल मीडिया पर धमकी भरे पोस्ट और वीडियो सामने आने के बाद माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया है। मामला इतना बढ़ गया कि उदयपुर पुलिस को अलर्ट मोड पर आना पड़ा।
धूली घाटी से शुरू हुआ विवाद
पूरा मामला चार दिन पहले उदयपुर जिले के गोगुंदा क्षेत्र की धूली घाटी में हुए एक शिलान्यास समारोह से जुड़ा है। इस कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने महाराणा प्रताप को लेकर एक बयान दिया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी।
कटारिया ने कहा कि “कांग्रेस शासन में महाराणा प्रताप का नाम नहीं लिया जाता था। महाराणा प्रताप को पहली बार जिंदा करने का काम बीजेपी सरकार ने किया।” यही बयान अब विवाद की जड़ बन गया है।
बीजेपी शासन में विकास का दावा
अपने संबोधन में कटारिया ने दावा किया कि गोगुंदा क्षेत्र के विकास की शुरुआत जनता पार्टी सरकार के समय हुई थी, जब भूरा भाई पहली बार विधायक बने। उन्होंने कहा कि चावंड, पोखरगढ़, हल्दीघाटी और उदय सिंह की छतरी जैसे ऐतिहासिक स्थलों को पहचान और विकास उनकी कोशिशों से मिला।
कटारिया ने यह भी सवाल उठाया कि क्या पहले कभी मायरे की गुफा तक पहुंच आसान थी? बीजेपी सरकार ने सड़क बनवाकर वहां पहुंच सुनिश्चित की और सार्वजनिक धन का सही उपयोग किया।
करणी सेना की आक्रामक प्रतिक्रिया
कटारिया के इस बयान के बाद क्षत्रिय करणी सेना की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। सोशल मीडिया पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत के नाम से एक पोस्ट और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आपत्तिजनक भाषा और खुली धमकी दी गई है।
पोस्ट में महाराणा प्रताप के कथित अपमान को लेकर नाराजगी जताई गई है और राज्यपाल को चेतावनी तक दी गई है। इसके बाद सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध में पोस्ट की बाढ़ आ गई।
पुलिस अलर्ट, जांच शुरू
राज्यपाल को धमकी मिलने के बाद उदयपुर पुलिस भी सतर्क हो गई है। एसपी योगेश गोयल ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और वीडियो की जांच की जा रही है।
हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस मामले में न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई की पुष्टि हुई है।
सम्मान बनाम राजनीति की नई जंग
महाराणा प्रताप केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि राजस्थान की अस्मिता का प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर दिया गया हर बयान राजनीति से ऊपर भावनाओं को छू जाता है। सवाल यह है कि क्या यह विवाद केवल बयान तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति में एक नया मोड़ लेगा? फिलहाल, प्रदेश की नजरें प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक दलों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।































































