पार्टी खत्म, सफर शुरू….लेकिन कार के अंदर जो हुआ, उसने पूरे उदयपुर को हिला दिया

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Udaipur Gangrape Case

Udaipur Gangrape Case: उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर से सामने आया गैंगरेप का मामला न सिर्फ चौंकाने वाला है, बल्कि कॉर्पोरेट दुनिया की काली सच्चाई भी उजागर करता है। एक आईटी फर्म की महिला मैनेजर के साथ कार में हुए गैंगरेप मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कंपनी का सीईओ, महिला एग्जीक्यूटिव हेड और उसका पति शामिल हैं।

तीन आरोपी गिरफ्तार, CEO भी शामिल

पुलिस ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें जीकेएम आईटी फर्म के सीईओ जितेश प्रकाश सिसोदिया, कंपनी की वुमेन एग्जीक्यूटिव हेड शिल्पा सिरोही और उसके पति गौरव सिरोही शामिल हैं। पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि तीनों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया।

मेडिकल रिपोर्ट ने की रेप की पुष्टि

पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई गई, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता के निजी अंगों और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोटों के निशान पाए गए हैं। इसके साथ ही शरीर में गंभीर दर्द का भी उल्लेख किया गया है, जो आरोपों को और पुख्ता करता है।

घटना 20 दिसंबर की है। पीड़िता कंपनी के सीईओ जितेश सिसोदिया की जन्मदिन पार्टी में शामिल हुई थी, जो शोभागपुरा स्थित एक होटल में आयोजित की गई थी। पार्टी रात 9 बजे शुरू हुई और देर रात करीब डेढ़ बजे तक चली। इस दौरान सभी ने शराब का सेवन किया। अधिक शराब पीने के कारण पीड़िता की तबीयत बिगड़ने लगी।

घर छोड़ने के बहाने कार में दिया गया नशीला पदार्थ

आरोपियों ने पीड़िता को घर छोड़ने की पेशकश की। कार गौरव सिरोही चला रहा था, जबकि पीछे की सीट पर शिल्पा, जितेश और पीड़िता बैठे थे। रास्ते में कार एक दुकान पर रोकी गई, जहां से सिगरेट जैसी दिखने वाली वस्तु खरीदी गई। पीड़िता के अनुसार, उसी वस्तु के सेवन के बाद वह बेहोश हो गई।

डैशकैम में कैद हुआ पूरा गुनाह

पीड़िता ने बताया कि होश में आने के बाद उसने अपने शरीर पर चोटों के निशान देखे। शक होने पर उसने कार का डैशकैम चेक किया, जिसमें उसके साथ हुई दरिंदगी पूरी तरह रिकॉर्ड थी। इतना ही नहीं, डैशकैम में आरोपियों के बीच की बातचीत भी कैद मिली।

पीड़िता 23 दिसंबर को डैशकैम फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट के साथ पुलिस के पास पहुंची। सबूतों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था, बल्कि कॉर्पोरेट कल्चर और महिला सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कंपनी में महिला मैनेजर सुरक्षित नहीं, वहां कार्यस्थल की नैतिकता पर सवाल उठना लाजमी है।

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