वायरल स्टिंग वीडियो या वास्तविक फुटेज…सदाचार कमेटी अब बताएगी किसने लिया कमीशन, किसने नहीं!

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Political Controversy

Political Controversy: विधायक निधि कोष से काम का लेटर जारी करने के बदले कथित कमीशनखोरी के मामले ने अब गंभीर संवैधानिक मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए स्टिंग वीडियो के बाद अब यह मामला विधानसभा की सदाचार कमेटी तक पहुंच चुका है, जहां जांच के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज और वीडियो सौंपे गए हैं।

अब तक यह मामला केवल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो तक सीमित था, लेकिन अब इसे औपचारिक जांच का हिस्सा बना लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक,(Political Controversy) वीडियो जारी करने वाले पक्ष की ओर से सदाचार कमेटी के सामने तथ्य, दस्तावेज और वीडियो साक्ष्य पेश किए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए अहम माना जा रहा है।

वायरल नहीं, अब मूल वीडियो भी कमेटी के पास

तीन जनप्रतिनिधियों से जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो सोशल मीडिया पर तो वायरल हुए थे, लेकिन सदाचार कमेटी के पास अब तक इनका आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था। हाल ही में कुछ लोग कमेटी के सामने पेश हुए और उन्होंने वीडियो बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार की। इसी के साथ, कमेटी को न केवल वायरल वीडियो बल्कि मूल (रॉ) वीडियो भी सौंपे गए हैं, जिससे जांच की दिशा अब निर्णायक मानी जा रही है।

वीडियो में सच्चाई कितनी?

मामले की जांच अब फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) के भरोसे है। FSL जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो में कितने कट लगाए गए हैं, एडिटिंग हुई है या नहीं, और मूल वीडियो में कौन-कौन से चेहरे साफ तौर पर नजर आते हैं। सूत्रों के अनुसार, अब तक मिले दस्तावेजों में दो विधायकों की सीधी भूमिका प्रारंभिक तौर पर सामने आ रही है।

हालांकि, एक विधायक के खिलाफ न तो पैसे लेने का कोई ठोस साक्ष्य कमेटी को मिला है और न ही वीडियो में ऐसी कोई स्पष्ट तस्वीर सामने आई है। इसके बावजूद कमेटी सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। इसके साथ ही कुछ अन्य विधायकों के वीडियो होने की चर्चाएं भी सामने आई थीं, जिनकी भी जांच की जा रही है।

जल्द सामने आएगी सच्चाई, सदन की साख दांव पर

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सदाचार कमेटी पूरी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि FSL की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि विधायक निधि से काम दिलाने के बदले किसने कमीशन लिया और किसने नहीं। यह जांच सिर्फ एक कथित स्टिंग का मामला नहीं, बल्कि विधानसभा की साख और जनप्रतिनिधियों की नैतिकता से जुड़ा सवाल बन चुकी है।

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