Rajasthan Politics : अरावली पर्वतमाला को लेकर देशभर में एक नई चेतना उभरती दिख रही है। सोशल मीडिया से शुरू हुई यह मुहिम अब सड़कों तक पहुंचने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कांग्रेस के कई नेता अरावली से जुड़े फोटो और वीडियो साझा कर केंद्र और राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।
अब यह मुद्दा सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहा। राजस्थान में लोग अरावली को बचाने के लिए सड़कों पर उतरने लगे हैं। इसी कड़ी में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने (Rajasthan Politics)अलवर स्थित अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता कर सरकार पर तीखे आरोप लगाए।
“अरावली चार राज्यों की लाइफलाइन है”
टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार अपने चहेते लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए अरावली को बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि अरावली गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा के लिए जीवन रेखा है। यह पर्वतमाला रेगिस्तान को फैलने से रोकती है और जमीन को पानी देने का काम करती है।
खनन बनाम भविष्य की लड़ाई
जूली ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान कोई नया खनन प्रस्ताव नहीं लाया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय केवल पहले से चल रही खानों को लेकर बात हुई थी, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार के नए प्रस्ताव से अरावली में नए खनन को मंजूरी देने का रास्ता खुलेगा, जो इस पर्वतमाला के अस्तित्व के लिए खतरा है।
वन्यजीव और जंगल भी खतरे में
अरावली क्षेत्र लाखों लोगों की आजीविका का आधार है। यही नहीं, हजारों वन्य जीवों का घर भी अरावली ही है। सरिस्का, रणथंभौर और मुकुंदरा जैसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व इसी क्षेत्र में स्थित हैं। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां इन जंगलों और जीवों के भविष्य को खत्म करने की ओर बढ़ रही हैं।
“सड़क से संसद तक संघर्ष होगा”
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार और उसके मंत्री जनता को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान की पूर्व गहलोत सरकार का प्रस्ताव पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किया जा चुका है। जूली ने ऐलान किया कि अरावली को बचाने का अभियान अब तेज होगा और कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक विरोध करेगी। कुल मिलाकर, यह लड़ाई अब सिर्फ राजनीति की नहीं रही। यह पर्यावरण, पानी, वन्यजीव और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बनती जा रही है।




































































