राफेल होगा और ताकतवर! भारतीय वायुसेना बना रही अपना सॉफ्टवेयर

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IAF Rafale: भारतीय वायुसेना अपने फाइटर स्क्वाड्रन को मजबूत करने के लिए फाइटर प्लेन की खरीद पर लगातार जोर दे रही है. साथ ही आत्मनिर्भर भारत के तहत टेक्निकल इंडिपेंडेंस पर भी विशेष तौर पर काम कर रही है. बता दें, इंडियन एयरफोर्स ने, डसॉल्ट राफेल फाइटर जेट के लिए (IAF Rafale)स्वदेशी फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर एनालिसिस सॉफ्टवेयर बनाने जा रही है.

अभी एयरफोर्स के बेड़े में 36 राफेल हैं और 114 शामिल होने के लिए लाइन में है. इंडियन एयरफोर्स से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भविष्य के युद्ध को देखते हुए राफेल को शत प्रतिशत स्वदेशी तकनीक से लैस करने का है. यानी बिल्कुल ही आसान जो मॉडर्न तकनीक से बना सॉफ्टवेयर हो उसे बनाने का काम किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में देशी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा.

वर्तमान में राफेल के साथ आने वाला मौजूदा FDR सॉफ्टवेयर करीब 400 उड़ान पैरामीटर को प्रोसेस करता है और 3D एनालिसिस भी करता है. लेकिन, यह सॉफ्टवेयर बहुत ही पेचीदा है, जिसे समझने में बहुत वक्त लगता है. इंडियन एयरफोर्स ‘मेक इन इंडिया’ से बने FDR एनालिसिस टूल बनाना चाहती है, जो यूजर फ्रेंडली हो और बहुत ही स्मार्ट तरीके से लैपटॉप/पीसी पर कहीं भी इस्तेमाल हो सके.

इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में अब लॉकहीड मार्टिन C-130J सुपर हरक्यूलिस, बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III, एयरबस C-295, बोइंग CH-47 चिनूक और बोइंग AH-64 अपाचे जैसे एडवांस प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इसके चलते अब एक यूनिवर्सल FDR डेटा माइनिंग सूट की जरूरत महसूस हो रही है, जो अलग-अलग विमानों के डेटा को एक साथ प्रोसेस कर सके.

पारंपरिक FDR सॉफ्टवेयर केवल पहले से तय समस्याओं को ही पहचान पाते हैं. नई या अनजानी तकनीकी खामियों को पकड़ने में ये सिस्टम कमजोर साबित होते हैं. इससे न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में विदेशी निर्भरता भी कम होगी.

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