Rajasthan ACB: अलवर/विराटनगर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम में रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कृषि भूमि के हस्तांतरण और रजिस्ट्री से जुड़े काम के बदले एक लाख रुपए की कथित (Rajasthan ACB)रिश्वत मांगने के मामले में ACB ने तहसीलदार समेत तीन लोगों को 55 हजार रुपए लेते हुए ट्रैप किया है। कार्रवाई में तहसीलदार संजय कुमार, कनिष्ठ सहायक देवीलाल और कथित बिचौलिए अशोक को पकड़ा गया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार परिवादी ने ACB को शिकायत दी थी कि कृषि भूमि के हस्तांतरण और रजिस्ट्री संबंधी काम के बदले उससे रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के बाद ACB ने मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर टीम ने कार्रवाई की योजना तैयार की।
एक लाख मांगे, 55 हजार पर सौदा तय
बताया जा रहा है कि आरोपियों की ओर से पहले एक लाख रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में बातचीत के बाद 55 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। इसके बाद ACB ने परिवादी को तय रकम के साथ भेजा और पूरी कार्रवाई पर नजर रखी।
रकम का लेन-देन होते ही ACB की टीम ने विराटनगर में दबिश देकर तहसीलदार संजय कुमार और कनिष्ठ सहायक देवीलाल को पकड़ लिया। उनके साथ कथित दलाल अशोक को भी हिरासत में लिया गया।
कार्रवाई ACB के एएसपी प्रशांत कौशिक के नेतृत्व में की गई। यह कार्रवाई डीआईजी डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन तथा ACB महानिदेशक गोविंद गुप्ता और अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में हुई।
अब खुलेंगे रिश्वत के नेटवर्क के राज?
ट्रैप के बाद ACB आरोपियों से पूछताछ कर रही है। उनके ठिकानों, दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 55 हजार रुपए की यह रिश्वत केवल इसी काम तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था?
आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
