Bangladesh Election 2026: ढाका। बांग्लादेश की राजनीति ने 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनावों के साथ एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज कर सत्ता में वापसी की है। इस जीत के साथ ही पार्टी के कार्यवाहक चेयरमैन तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। उन्होंने सरकार गठन का आधिकारिक दावा पेश कर दिया है।
करीब 36 वर्षों बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। (Bangladesh Election 2026)राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा में बदलाव का संकेत है।
सत्ता और संघर्ष के बीच बीता जीवन
20 नवंबर 1965 को ढाका में जन्मे तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री रहीं खालिदा जिया के पुत्र हैं। बचपन से राजनीति के माहौल में पले-बढ़े तारिक ने 1990 के दशक में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। 1991 में अपनी मां को सत्ता तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही।
2001 में जब खालिदा जिया दोबारा प्रधानमंत्री बनीं, तब तारिक पार्टी के भीतर सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल हो गए। उस समय ढाका का ‘हवा भवन’ सत्ता का केंद्र माना जाता था। हालांकि इसी दौर में उन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे और विपक्षी अवामी लीग ने उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ की संज्ञा दी।
गिरफ्तारी, निर्वासन और कानूनी लड़ाई
2006-07 के राजनीतिक संकट ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के दौरान मार्च 2007 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले सहित 84 मुकदमे दर्ज किए गए। जेल में कथित यातनाओं के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई।
सितंबर 2008 में जमानत मिलने के बाद वे इलाज के लिए लंदन चले गए और 17 वर्षों तक वहीं से पार्टी का संचालन करते रहे। शेख हसीना के शासनकाल में उन्हें एक मामले में मौत की सजा भी सुनाई गई थी।
छात्र आंदोलन के बाद बदला राजनीतिक परिदृश्य
अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद बनी अंतरिम सरकार ने तारिक रहमान को कानूनी राहत दी। अदालतों ने उनके खिलाफ चल रहे मामलों को खारिज कर दिया।
दिसंबर 2025 में स्वदेश लौटने पर ढाका हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत हुआ। वापसी के मात्र 50 दिनों के भीतर उन्होंने चुनाव लड़ा और ढाका-17 तथा बोगरा-6 सीटों से जीत हासिल की।
नई छवि, नए वादे
60 वर्ष की आयु में तारिक रहमान अब खुद को एक परिपक्व और संयमित नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने स्वच्छ राजनीति, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस, युवाओं के लिए रोजगार और लोकतंत्र की पूर्ण बहाली का वादा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन बांग्लादेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई सरकार अपने वादों को किस तरह अमल में लाती है।
