Rajasthan Politics News: जयपुर। विधानसभा के प्रश्नकाल में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब भाजपा विधायक बहादुर सिंह कोली ने अवैध खनन और औद्योगिक प्रदूषण के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। कोली ने साफ कहा कि “एक तरफ मुख्यमंत्री कहते हैं कि( Rajasthan Politics News) बड़े मगरमच्छ नहीं बचेंगे, दूसरी तरफ रेंजर-फोरेस्टर बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं कर रहे, सिर्फ ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी जा रही हैं।”
“चलिए साथ, सच सामने आ जाएगा”
वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा से सीधे संवाद करते हुए विधायक कोली ने कहा कि यदि मंत्री चाहें तो वे मौके पर साथ चलें, सच्चाई खुद सामने आ जाएगी। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि कार्रवाई लगातार जारी है और यदि कोई विशेष मामला बताया जाता है तो उस पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वैर क्षेत्र में प्रदूषण का मुद्दा
विधायक ने वैर विधानसभा क्षेत्र में स्थापित औद्योगिक इकाइयों से फैल रहे प्रदूषण का मामला उठाया। मंत्री ने बताया कि क्रेशर संचालन के निर्धारित नियमों की पालना अनिवार्य है। यदि शिकायत मिलती है तो संबंधित इकाई के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
- कन्वेयर बेल्ट को ढंकना अनिवार्य
- परिसर में नियमित सफाई
- विंड ब्रेकिंग वॉल का निर्माण
- धूल नियंत्रण के लिए वॉटर स्प्रिंकलर
- ग्रीन बेल्ट विकसित करना
मंत्री ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है और अवैध खनन पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
सरकार बनाम सरकार? सवालों से बढ़ी असहजता
सियासी गलियारों में चर्चा है कि जब सत्तारूढ़ दल का विधायक ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, तो यह प्रशासनिक अमले की जवाबदेही पर बड़ा संकेत माना जाता है। विपक्ष ने भी इसे सरकार की अंदरूनी नाराजगी का संकेत बताया है।
40.93 करोड़ स्वीकृत, फिर भी अस्पताल निर्माण अटका
शून्यकाल में कांग्रेस सदस्य मनीष यादव ने उप जिला एवं ट्रोमा अस्पताल निर्माण में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में 40.93 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद तीन साल में भी काम शुरू नहीं हुआ।
बताया गया कि अक्टूबर 2025 में तमिया स्टेडियम के पास आवंटित भूमि बहाव क्षेत्र में पाई गई, जिसे पीडीकोर ने अस्पताल निर्माण के लिए असुरक्षित बताया। अब नए स्थल चयन और प्रक्रिया को लेकर असमंजस बना हुआ है।
सवालों के घेरे में जवाबदेही
विधानसभा की कार्यवाही ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन, औद्योगिक प्रदूषण और अधूरे विकास कार्य जैसे मुद्दे अब राजनीतिक असहमति का कारण बन रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार इन सवालों पर क्या ठोस कदम उठाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
