Supreme Court on Flight Fare: नई दिल्ली। त्योहार और छुट्टियां आते ही हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ जाना आम यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। जिन परिवारों को महीनों पहले यात्रा की योजना बनानी पड़ती है, उन्हें कई बार आखिरी समय में सामान्य किराए से कई गुना (Supreme Court on Flight Fare)अधिक रकम चुकानी पड़ती है। अब इसी समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है।
‘नियम नहीं मानते तो उड़ानें रोक दी जाएं’
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी को लेकर सुनवाई के दौरान एयरलाइन्स पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि अगर एयरलाइन्स तय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं तो उनकी उड़ानें रोकने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन उसके पालन और प्रभावी नियमन को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
सरकार बना रही है नए नियम
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराए और अलग-अलग शुल्क से जुड़े नए नियम तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। केंद्र की ओर से नियमों का मसौदा कोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सौंपा गया। सरकार ने नियमों को अंतिम रूप देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मी नारायणन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में निजी एयरलाइन्स पर मनमाने तरीके से किराया तय करने और यात्रियों से अलग-अलग अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि आधिकारिक नियम होने के बावजूद उनका प्रभावी पालन नहीं हो रहा। याचिका में हवाई किराए में पारदर्शिता लाने और यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए मजबूत नियामक व्यवस्था की मांग की गई है।
त्योहारों में यात्रियों की सबसे बड़ी परेशानी
त्योहारी सीजन में घर जाने वाले परिवारों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए टिकट का बढ़ता किराया सीधा बजट बिगाड़ देता है। खासकर अंतिम समय में यात्रा करने वालों के सामने कई बार महंगी टिकट खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।सुप्रीम कोर्ट पहले भी त्योहारों और बड़े आयोजनों के दौरान हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी पर नाराजगी जता चुका है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी। उस दिन केंद्र सरकार नए नियमों का अंतिम रूप अदालत के सामने रख सकती है।
