Rajasthan News: राजस्थान आयुर्वेद विभाग में 926 रिक्त चिकित्साधिकारी पदों पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति के निर्णय का विरोध तेज हो गया है। डॉ. भंवर चौधरी के नेतृत्व में युवा आयुर्वेद चिकित्सकों ने उपमुख्यमंत्री प्रेमचन्द बैरवा को ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को तत्काल निरस्त करने और (Rajasthan News)नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। चिकित्सकों का कहना है कि पुनर्नियुक्ति से हजारों योग्य बेरोजगार युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे।
’10 हजार योग्य युवा रोजगार की प्रतीक्षा में’
ज्ञापन सौंपने के बाद डॉ. भंवर चौधरी ने कहा कि राजस्थान में लगभग 10 हजार आयुर्वेद स्नातक, एम.डी. और पीएच.डी. योग्यताधारी युवा चिकित्सक लंबे समय से सरकारी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। इसके बावजूद विभाग द्वारा 926 रिक्त पदों पर नई भर्ती करने के बजाय सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारियों की पुनर्नियुक्ति का निर्णय लिया गया है, जो युवाओं के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि सरकार को रिक्त पदों पर नियमित नियुक्तियां कर युवाओं को रोजगार का अवसर देना चाहिए, न कि अस्थायी व्यवस्थाओं के माध्यम से रिक्तियां भरनी चाहिए।
युवा चिकित्सकों ने रखीं चार प्रमुख मांगें
ज्ञापन में आयुर्वेद विभाग द्वारा जारी पुनर्नियुक्ति संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। साथ ही विभाग में रिक्त 926 पदों सहित सभी स्वीकृत रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने का आग्रह किया गया।
इसके अलावा सहायक प्राध्यापक, मेडिकल ऑफिसर तथा अन्य शैक्षणिक पदों पर केवल NCISM के मानकों के अनुरूप योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा शैक्षणिक और चिकित्सकीय पदों का पृथक्करण करने की मांग भी उठाई गई। चिकित्सकों का कहना है कि वर्ष 2021 से राज्य के आठ राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालयों में चिकित्सकों से डेपुटेशन के माध्यम से कार्य लिया जा रहा है, जबकि इन पदों पर नियमित नियुक्तियां की जानी चाहिए।
नियमित रोजगार की मांग, आंदोलन की चेतावनी
युवा आयुर्वेद चिकित्सकों ने संविदा, अस्थायी और पुनर्नियुक्ति आधारित व्यवस्था के बजाय नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। डॉ. चौधरी ने कहा कि उनकी मांग केवल न्यायसंगत अवसर और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो राज्यभर के युवा आयुर्वेद चिकित्सक लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
