Somnath Shourya Yatra: सोमनाथ (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में भाग लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का दुग्धाभिषेक किया और (Somnath Shourya Yatra) विधिवत पूजा-अर्चना कर देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नमन किया।
108 घोड़ों के साथ शौर्य यात्रा
मंदिर में पूजा से पहले सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से भव्य शौर्य यात्रा निकाली गई। इस ऐतिहासिक यात्रा में 108 घोड़े शामिल हुए, जो साहस, शौर्य और बलिदान की परंपरा के प्रतीक बने।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस शौर्य यात्रा का हिस्सा बने। हाथ में डमरू लिए पीएम मोदी का यह दृश्य आध्यात्मिक ऊर्जा और राष्ट्रगौरव से भरा नजर आया। डमरू को शिव शक्ति और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक माना जाता है, जिसने पूरे आयोजन को एक विशेष आध्यात्मिक रंग दे दिया।
‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा सोमनाथ
शौर्य यात्रा के दौरान चारों ओर ‘हर हर महादेव’ और भारत माता की जय के जयकारे गूंजते रहे। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और भजनों के बीच निकली यह यात्रा सोमनाथ की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करती दिखाई दी।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और ऐतिहासिक बना दिया। हर दृश्य कैमरों में कैद हुआ, जहां इतिहास, आस्था और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
पीएम मोदी बोले…
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “इस आयोजन में गर्व है, गरिमा है और गौरव है। इसमें वैभव की विरासत है, अध्यात्म की अनुभूति है, आनंद है, आत्मीयता है और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है।”
पीएम मोदी ने आयोजन की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा, “72 घंटों तक अनवरत ओंकार नाद, 72 घंटों का मंत्रोच्चार, 1000 ड्रोन के माध्यम से सोमनाथ के 1000 वर्षों की गाथा, वैदिक गुरुकुलों के 1000 विद्यार्थी और आज 108 अश्वों के साथ शौर्य यात्रा— यह सब मंत्रमुग्ध कर देने वाला है।” उन्होंने कहा कि इस अनुभव को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता, इसे केवल समय ही संजोकर रख सकता है।
शौर्य यात्रा में पीएम मोदी की भागीदारी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को ऐतिहासिक बना दिया। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए वीरता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणास्रोत बनकर याद रखा जाएगा।




































































