Viral Video Controversy: बरेली/नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दो महिलाएं बुर्का पहने कंधे पर कांवड़ उठाकर शिव मंदिर की ओर जाती दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है।
जहां कुछ लोग इसे सांप्रदायिक सौहार्द और ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ की मिसाल बता रहे हैं, वहीं कई मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या है पूरा मामला?
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दोनों महिलाएं जलाभिषेक के लिए कांवड़ लेकर जा रही थीं। हालांकि वीडियो कब और कहां का है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बहस का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या किसी एक धर्म का अनुयायी दूसरे धर्म की धार्मिक परंपराओं या अनुष्ठानों में भाग ले सकता है?
मौलाना शहाबुद्दीन रजबी का बयान
इस मामले पर बरेली स्थित ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजबी ने आधिकारिक बयान जारी किया है। उन्होंने शरियत का हवाला देते हुए कहा कि इस्लाम में दूसरे मजहब के धार्मिक रीति-रिवाजों को अपनाने की इजाजत नहीं है।
शरियत का हवाला: किसी भी मुस्लिम पुरुष या महिला को दूसरे धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों या त्योहारों में शामिल होना मान्य नहीं है।
पहचान का सवाल: उन्होंने हदीस का जिक्र करते हुए कहा कि जो व्यक्ति किसी दूसरी कौम की तरह आचरण करता है, उसकी गिनती उसी में की जाती है।
धार्मिक दृष्टिकोण: कांवड़ उठाना या जलाभिषेक करना इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार अनुचित बताया गया है।
समाज से अपील
मौलाना रजबी ने संबंधित महिलाओं और मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे ऐसे कदमों से बचें जो धार्मिक विवाद को जन्म दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि अनजाने में कोई गलती हुई है, तो उसके लिए तौबा (माफी) का रास्ता अपनाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय बंटी हुई है। एक वर्ग इसे आपसी भाईचारे की मिसाल मान रहा है, तो दूसरा वर्ग इसे धार्मिक सीमाओं के उल्लंघन के रूप में देख रहा है। फिलहाल, यह मामला सामाजिक और धार्मिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
