विदेशी नौकरी के नाम पर भारतीय युवाओं को बना रहे थे ‘साइबर गुलाम’, राजस्थान पुलिस ने पकड़ा अंतरराष्ट्रीय गैंग

Rajasthan Police

Rajasthan Police: जयपुर  विदेश में मोटी सैलरी वाली नौकरी का झांसा देकर भारतीय युवाओं को साइबर ठगी और मानव तस्करी के जाल में फंसाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का राजस्थान पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।(Rajasthan Police) जांच में सामने आया कि गिरोह युवाओं को कंबोडिया, लाओस, वियतनाम और म्यांमार भेजकर उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र छीन लेता था तथा उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर करता था।

ब्यावर और कोलकाता से हुई गिरफ्तारी

एडीजी (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि ब्यावर से राजकरण उर्फ रॉनी और सागर सिंह को गिरफ्तार किया गया, जबकि जीतूराज फुलवारी उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से पकड़ा गया। तीनों आरोपी म्यांमार जाने की तैयारी में थे। आरोपियों के कब्जे से पासपोर्ट, मोबाइल फोन, विदेशी दस्तावेज और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के डाटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें नौकरी का लालच देकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजा गया। इनमें से कई अब तक भारत वापस नहीं लौटे हैं। लौटे पीड़ितों ने खुलासा किया कि वहां उनके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जबरन ऑनलाइन ठगी करवाई जाती थी।

फेक प्रोफाइल और क्रिप्टो फ्रॉड का खेल

जांच में सामने आया कि स्कैम सेंटरों में युवाओं को पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से दोस्ती की जाती और उन्हें क्रिप्टो निवेश व मोटे मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की जाती थी। ठगी की रकम म्यूल अकाउंट्स के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेशी हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी।

पुलिस के अनुसार गिरोह के कई अन्य सदस्य अभी फरार हैं। अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। राजस्थान पुलिस ने युवाओं से विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों की सत्यता जांचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देने की अपील की है।

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