महादेव बुक केस में नए खुलासे, ED के हाथ लगीं ऐसी फाइलें जो कई नेताओं की नींद उड़ा सकती

Online Betting Scam

Online Betting Scam: नई दिल्ली/रायपुर: महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ा संदेश दिया है—कानून से बचकर भागने वालों की संपत्तियां आखिरकार सरकारी कब्जे में ही जाती हैं। रायपुर जोनल ऑफिस की ताजा कार्रवाई में ED ने करीब 21.45 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अटैच कर लिया है।

यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत की गई है, जिसने सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े लोगों की नींद उड़ा दी है। खास बात यह है कि इस बार कार्रवाई सिर्फ (Online Betting Scam)भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि दुबई में बने लग्जरी अपार्टमेंट्स और कीमती प्रॉपर्टी भी ED के रडार पर आ गईं।

दुबई की चमक के पीछे छिपा काले धन का खेल

जांच में सामने आया है कि महादेव सट्टा नेटवर्क का संचालन दुबई से किया जा रहा था। आलीशान अपार्टमेंट, दुकानें और महंगी जमीनें उस अवैध कमाई की गवाही दे रही हैं, जो ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए जुटाई गई थी।

ED के मुताबिक, इन संपत्तियों को जानबूझकर विदेशी लोकेशन पर खरीदा गया, ताकि भारतीय एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके। लेकिन अब वही प्रॉपर्टी इस घोटाले की सबसे बड़ी कड़ी बन गई है।

रवि उप्पल से लेकर पैनल संचालकों तक गिरी गाज

अटैचमेंट ऑर्डर में महादेव बुक के मुख्य प्रमोटर रवि उप्पल का नाम सबसे ऊपर है। फरार चल रहे उप्पल की दुबई स्थित करीब 6.75 करोड़ रुपये की संपत्ति को ED ने अपने कब्जे में ले लिया है।

इसके अलावा सौरभ चंद्राकर के करीबी रजत कुमार सिंह, सौरभ आहूजा और विशाल रमानी की संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने सैकड़ों पैनल्स के जरिए देशभर में ऑनलाइन सट्टेबाजी का जाल फैलाया और करोड़ों की कमाई की।

जयपुर-दिल्ली तक पहुंचा ED का एक्शन

जांच सिर्फ बड़े प्रमोटर्स तक सीमित नहीं रही। विनय कुमार और हनी सिंह जैसे पैनल संचालकों के जयपुर और दिल्ली स्थित मकानों को भी अटैच किया गया है।

इतना ही नहीं, महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां, जो सट्टे की कमाई से खरीदी गई थीं, अब सरकारी नियंत्रण में हैं।

फर्जी खातों से सफेद होता रहा काला धन

ED की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अवैध मुनाफे को छिपाने के लिए हजारों ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ का इस्तेमाल किया गया। आम लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर ये खाते खोले गए, जिनके जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाया जाता था।

सूत्रों के अनुसार, सट्टे से होने वाली कमाई का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा सीधे मुख्य प्रमोटर्स तक पहुंचता था, जबकि बाकी रकम नेटवर्क में शामिल लोगों में बांटी जाती थी।

अब तक की सबसे बड़ी तस्वीर

महादेव सट्टेबाजी मामले में ED अब तक 175 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। कुल मिलाकर 2621 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा चुकी है।

इस हाई-प्रोफाइल केस में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने अब तक 5 प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दाखिल की हैं।

ED अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाले दिनों में नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं और संपत्तियों पर कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

संकेत साफ हैं—महादेव सट्टा केस अब सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि देश-विदेश में फैले अवैध नेटवर्क की पूरी परतें खोलने वाला मामला बन चुका है।

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