
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी थाना क्षेत्र स्थित छापोली गांव में सड़क निर्माण के दौरान हुआ हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक जल्दबाजी का नग्न रूप प्रस्तुत करता है। कदम कुंड मार्ग पर बन रही सड़क के दौरान जब गिट्टी-सीमेंट मिक्सर मशीन का हाइड्रोलिक जैक ऊपर से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली लाइन से टकराया, तो करंट पूरी मशीन में फैल गया। मशीन को बचाने और काम में जुटे आठ मजदूरों की मौके पर ही झुलसने से जान चली गई।
घटना के बाद पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवारों का सीधा आरोप है कि पंचायत समिति और जिला परिषद चुनावों से ठीक पहले सड़क का काम पूरा करने का भारी दबाव था। गांव वालों के अनुसार, लंबे समय से अटका यह कार्य चुनावी वोट बैंक साधने के लिए आनन-फानन में शुरू किया गया था। बिना किसी पूर्व सुरक्षा निरीक्षण और बिना पावर कट लिए हाई-टेंशन तार के इतने करीब काम शुरू कराना सीधे तौर पर मजदूरों को मौत के मुंह में धकेलने जैसा था।
मामले ने अब तूल पकड़ लिया है, क्योंकि पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी पर भी चुनावी फायदे के लिए दबाव बनाने के आरोप लग रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए चुनावी बयानों के वीडियो ने इन सवालों को और हवा दे दी है। हालांकि जनप्रतिनिधि और प्रशासन इन आरोपों पर सफाई पेश कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि काम की गति बढ़ाने के चक्कर में मूलभूत सुरक्षा नियमों को दरकिनार कर दिया गया।
यह हादसा एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर विकास की इस अंधी दौड़ और चुनावी समयसीमा की कीमत गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर क्यों चुकानी पड़े? विद्युत विभाग, लोक निर्माण विभाग और ठेकेदार की साझा लापरवाही ने आठ परिवारों के चिराग बुझा दिए। क्या केवल मुआवजा घोषित कर देने से जवाबदेही खत्म हो जाएगी, या दोषी अधिकारियों व ठेकेदार पर सख्त आपराधिक कार्रवाई होगी, यह देखने योग्य विषय है।