मजदूर, किसान और पंचायत—जी राम जी बिल पर किसे मिलेगा जनता का भरोसा?

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MGNREGA controversy

MGNREGA controversy: नई दिल्ली। जी राम जी बिल को लेकर विपक्ष के हमलों के बीच अब भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष जनता को भ्रमित कर यह डर फैलाने की कोशिश कर रहा है कि नई योजना से मनरेगा खत्म हो जाएगा और मजदूरों के अधिकार छिन जाएंगे। इसी नैरेटिव को तोड़ने के लिए बीजेपी अब सीधे गांवों (MGNREGA controversy) तक पहुंचने की तैयारी में है।

“भ्रम नहीं, हकीकत बताएंगे”

बीजेपी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया, “मजदूरों के मन में डर बैठाया जा रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें बताया जाए कि योजना से उनका नुकसान नहीं, बल्कि फायदा होगा।” पार्टी का फोकस आम ग्रामीण, खेतिहर मजदूर और छोटे किसानों से सीधा संवाद बनाने पर है।

बीजेपी ने तय किया है कि संगठन को जिला और ब्लॉक स्तर तक पूरी तरह सक्रिय किया जाएगा। सभी बीजेपी शासित राज्यों में मुख्यमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी इस अभियान की अगुवाई करेंगे। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी के बड़े नेता भी मैदान में उतरेंगे।

चार बिंदुओं पर टिकेगा बीजेपी का नैरेटिव

  • ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों, तालाबों और सार्वजनिक संपत्तियों का निर्माण
  • आजीविका: मजदूरों को नियमित और स्थानीय स्तर पर रोजगार
  • मौसम से मुकाबला: सूखा-बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी
  • जल संचयन: बारिश के पानी को सहेजने पर विशेष जोर

पार्टी गांवों में यह संदेश देगी कि नई योजना से भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और मजदूरों को सीधे लाभ मिलेगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस से डोर-टू-डोर तक

बीजेपी की योजना प्रेस कॉन्फ्रेंस, जनसभाओं, किसान-मजदूर सम्मेलनों और डोर-टू-डोर संपर्क के जरिए विपक्ष के दावों को भ्रामक साबित करने की है। पार्टी कार्यकर्ताओं को तथ्य, आंकड़े और सरल भाषा में समझाने के लिए विशेष ब्रीफिंग दी जाएगी। सियासी जानकारों का मानना है कि बीजेपी की कोशिश किसी संभावित आंदोलन से पहले ही नैरेटिव की लड़ाई जीतने की है। पार्टी नहीं चाहती कि ग्रामीण इलाकों में गलतफहमी गहराए और इसका राजनीतिक नुकसान हो।

गांव की राय बनेगी निर्णायक

जी राम जी बिल पर यह टकराव अब सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रह गया है। आने वाले दिनों में यह लड़ाई गांव की चौपालों और खेतों तक पहुंचेगी, जहां मजदूर और किसान तय करेंगे कि उन्हें किसकी बात पर भरोसा है।

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