टिकट, तंज और तकरार! विजय बैंसला के बयान से गरमाई BJP की राजनीति, आखिर क्यों बोले ऐसा?

Sawai Madhopur News: सवाई माधोपुर। राठौद गांव में आयोजित ‘बगड़ावत संगम महोत्सव’ के मंच से दिया गया एक बयान अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष और बीजेपी नेता विजय बैंसला ने अपनी ही पार्टी के विधायक राजेंद्र गुर्जर पर सार्वजनिक (Sawai Madhopur News)रूप से तंज कस दिया, जिसके बाद इस बयान के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

“मैं क्या करूं भाई…” मंच से छलका दर्द

कार्यक्रम के दौरान भाषण देते हुए बैंसला ने कहा, “मुझे जब टिकट मिला तो राजेंद्र गुर्जर अपना फोन बंद करके बैठ गए. वो राजेंद्र गुर्जर, जिन्हें कर्नल साहब ने हाथ पकड़कर टिकट दिलवाया था, वो भी संघर्ष समिति के थे… अब मैं क्या करूं भाई?” उनका यह बयान सीधे तौर पर पार्टी के भीतर की खींचतान की ओर इशारा करता दिखा।

2023 चुनाव और उपचुनाव की पृष्ठभूमि

देवली-उनियारा सीट से 2023 के विधानसभा चुनाव में विजय बैंसला मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बाद में उपचुनाव में टिकट को लेकर अटकलें थीं, मगर बीजेपी ने राजेंद्र गुर्जर को उम्मीदवार बनाया। ऐसे में बैंसला का मंच से दिया गया यह बयान राजनीतिक संकेतों से भरा माना जा रहा है।

बताया जाता है कि 2023 चुनाव के दौरान कुछ नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप भी लगे थे, जिससे यह बयान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

गुर्जर आंदोलन की पृष्ठभूमि में बयान

गुर्जर आरक्षण आंदोलन लंबे समय से राजस्थान की राजनीति में प्रभावशाली रहा है। इस आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीतिक भूमिका भी अहम रही है। ऐसे में बैंसला का अपनी ही पार्टी के विधायक पर सार्वजनिक टिप्पणी करना गुर्जर समाज और बीजेपी दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गया है।

हार्दिक पटेल का सामाजिक संदेश

कार्यक्रम में मौजूद हार्दिक पटेल ने गुर्जर समाज की विरासत और इतिहास की सराहना की। उन्होंने 24 बगड़ावत भाइयों की लोकगाथाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं।

पटेल ने कहा, “लोग पूछते हैं कि क्या पटेल और गुर्जर एक हैं? मेरा जवाब हमेशा यही होता है कि पटेल, पाटीदार, कुनबी, कुर्मी, मराठा, गुर्जर और कापू मूल रूप से एक ही सामाजिक धारा से जुड़े हैं।”

वीडियो वायरल, बढ़ी राजनीतिक हलचल

महोत्सव का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक एकता के मंच से निकला यह बयान आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

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