9 सितंबर को संसद तय करेगी नया उपराष्ट्रपति….क्या सीपी राधाकृष्णन या बी. सुदर्शन रेड्डी जीतेंगे? पढ़ें पूरा प्रोसेस

Vice President Election:

कौन कर रहा है मतदान?

उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल संसद सदस्य (लोकसभा और राज्यसभा दोनों के) मतदाता होते हैं — इसमें निर्वाचित और मनोनीत दोनों प्रकार के सांसद शामिल हैं। लोकसभा के 542 और राज्यसभा के 240 सदस्यों सहित कुल लगभग 782 सांसद इस चुनाव में वोट डालने वाले हैं; लेकिन खाली सीटों या अन्य कारणों से वास्तविक संख्या थोड़ी कम हो सकती है।

चुनाव प्रक्रिया — कदम दर कदम

  • निर्वाचक मंडल की लिस्ट: चुनाव आयोग ने तय किया कि कौन-कौन मतदान करेगा — केवल सांसद ही मतदाता हैं।
  • अधिसूचना और नामांकन: इस बार अधिसूचना 7 अगस्त 2025 को जारी हुई; नामांकन की अंतिम तिथि 21 अगस्त थी और नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 25 अगस्त थी।
  • नामांकन के लिए समर्थन: किसी व्यक्ति के नामांकन के लिए कम से कम 20 सांसदों का प्रस्ताव और 20 सांसदों का समर्थन (कुल 40 सांसद) जरूरी है।
  • वोटिंग पद्धति: गुप्त मतदान के माध्य से ‘सिंगल ट्रांसफरेबल वोट’ (STV) सिस्टम का उपयोग होगा — सांसद बैलेट पर प्राथमिकता 1, 2, 3… लिखेंगे।
  • विजयी मानदंड: यदि किसी उम्मीदवार को पहले ही चरण में कुल मतों का 50% से अधिक मिल जाता है तो वह विजयी होगा; अन्यथा निचले मत पाने वाले उम्मीदवारों के मत उनकी दूसरी पसंदों में ट्रांसफर होते रहेंगे, जब तक कोई बहुमत न पा ले।
  • मतदान-गणना का एक ही दिन में होना: मतदान और मतगणना दोनों 9 सितंबर 2025 को ही होंगे, इसलिए परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।

मुख्य उम्मीदवार

NDA: सीपी राधाकृष्णन — NDA का आधिकारिक प्रत्याशी।

INDIA गठबंधन: बी. सुदर्शन रेड्डी — विपक्षी गठबंधन का उम्मीदवार।

क्या बदलता है राष्ट्रपति चुनाव से?

राष्ट्रपति चुनाव में निर्वाचक मंडल में राज्य विधानसभाएँ भी शामिल होती हैं और वोटों का भार (value) अलग-अलग होता है। जबकि उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल संसद सदस्य ही मतदाता हैं और हर सांसद के वोट का माप बराबर रखा जाता है — यही बड़ा अंतर है।

क्या जानना जरूरी है?

  • मतदान गुप्त होगा — सांसद अपनी प्राथमिकताएँ लिखकर वोट देंगे।
  • यदि कोई उम्मीदवार पहले चरण में साधारण बहुमत नहीं लेता, तो कटऑफ-प्रक्रिया के जरिए दूसरे-तीसरे पसंद के मत ट्रांसफर होंगे।
  • मतदान-सत्र और त्वरित मतगणना के कारण नतीजा उसी रात तय हो सकता है — इसलिए राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों की नजरें संसद पर टिकी रहेंगी।
 

 

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