वेनेजुएला के बाद क्यूबा पर ट्रंप की खुली धमकी, तेल बंद, क्या सड़कों पर फूटेगा जनता का गुस्सा

International Politics

International Politics: लैटिन अमेरिका में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद अब क्यूबा में बड़े विरोध प्रदर्शनों की आशंका जताई जा रही है। हालात इसलिए और संवेदनशील हो गए हैं क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा को खुली चेतावनी दे दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि क्यूबा के पास अब दो ही रास्ते हैं—या तो वह वाशिंगटन के साथ समझौता करे, या फिर इसके गंभीर (International Politics) परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्यूबा पहले से ही गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रहा है।

वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका का दावा

दरअसल, क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला के तेल पर निर्भर रहा है। लेकिन अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर कार्रवाई और तेल टैंकरों की जब्ती के बाद क्यूबा की सप्लाई लगभग ठप हो गई है। राष्ट्रपति ट्रंप अब वेनेजुएला के तेल भंडार पर खुलकर दावा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में ट्रंप ने लिखा कि क्यूबा को अब न तो तेल मिलेगा और न ही पैसा। उन्होंने चेतावनी दी कि बहुत देर होने से पहले क्यूबा को समझौता कर लेना चाहिए, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस तरह के समझौते की बात कर रहे हैं।

“अब वेनेजुएला की सुरक्षा अमेरिका करेगा”

ट्रंप ने अपने बयान में वेनेजुएला की पूर्व सरकारों और सहयोगियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला को अब उन “गुंडों और जबरन वसूली करने वालों” से सुरक्षा की जरूरत नहीं है, जिन्होंने सालों तक देश को गुलाम बनाए रखा। ट्रंप के मुताबिक, अब वेनेजुएला की रक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका के हाथ में है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान अमेरिका की बढ़ती दखलअंदाजी और क्षेत्र में दबदबा कायम करने की रणनीति का संकेत है।

क्यूबा में गहराता तेल संकट

क्यूबा पहले से ही ईंधन कटौती, बिजली संकट और आर्थिक दबाव का सामना कर रहा था। ऐसे में अमेरिका द्वारा तेल और धन की आपूर्ति पूरी तरह रोकने की घोषणा ने हालात और बिगाड़ दिए हैं।

जानकारों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं संभली, तो क्यूबा में सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।

अमेरिका को दो टूक जवाब

क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने ट्रंप की चेतावनी का सख्त जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि क्यूबा एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और किसी भी बाहरी ताकत को निर्देश देने का अधिकार नहीं है। डियाज-कैनेल ने साफ किया कि क्यूबा किसी टकराव की इच्छा नहीं रखता, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो वह अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए खून की आखिरी बूंद तक बहाने को तैयार है। वहीं क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वाशिंगटन आपराधिक तरीकों से वैश्विक शांति को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि क्यूबा ने वेनेजुएला को सुरक्षा सेवाएं देने के बदले भुगतान लिया था।

वेनेजुएला, क्यूबा और अमेरिका के बीच बढ़ता यह टकराव सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिन इस क्षेत्र के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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