Spain joins India-led IPOI: जब अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में खटास की चर्चाएं तेज हैं और ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने यूरोपीय राजनीति में हलचल मचा रखी है, उसी बीच वैश्विक भू-राजनीति में एक अहम मोड़ देखने को मिला है। यूरोप का प्रभावशाली देश स्पेन अब खुलकर भारत के साथ खड़ा नजर आ रहा है।
भारत की अगुवाई में शुरू किए गए इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) में स्पेन की औपचारिक भागीदारी सिर्फ एक कूटनीतिक कदम नहीं, बल्कि समुद्री शक्ति संतुलन और(Spain joins India-led IPOI) वैश्विक रणनीति में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
IPOI क्या है और भारत का मकसद क्या?
इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में की थी। इस पहल का मूल विचार बेहद स्पष्ट है—समुद्र किसी एक देश की जागीर नहीं, बल्कि साझा वैश्विक संसाधन है।
भारत चाहता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुरक्षित, खुले और नियम-आधारित तरीके से संचालित हो, जहां व्यापार, नौवहन और संसाधनों का इस्तेमाल बिना दबाव और डर के किया जा सके।
IPOI के मुख्य स्तंभ
IPOI केवल सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं है। इसके तहत कई अहम पहलुओं पर सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है, जिनमें शामिल हैं…समुद्री सुरक्षा और नौवहन मार्गों की रक्षा आतंकवाद और पाइरेसी से मुकाबलासमुद्री पर्यावरण और प्लास्टिक प्रदूषण से संरक्षणब्लू इकोनॉमी और मत्स्य पालन का सतत विकासआपदा प्रबंधन में सहयोगवैज्ञानिक शोध और समुद्री डेटा साझा करना इन सभी प्रयासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से चलता रहे।
अमेरिका-यूरोप तनाव के बीच भारत क्यों बना भरोसे का केंद्र?
स्पेन का IPOI में शामिल होना यह दर्शाता है कि यूरोप अब केवल पारंपरिक पश्चिमी धुरी पर निर्भर नहीं रहना चाहता। डोनाल्ड ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों ने यूरोपीय देशों को नए, स्थिर और भरोसेमंद साझेदार तलाशने पर मजबूर किया है।
भारत, जो न तो दबाव की कूटनीति अपनाता है और न ही कर्ज के जाल में फंसाने वाली नीति, यूरोप के लिए एक स्वाभाविक विकल्प बनकर उभरा है। स्पेन का फैसला इसी बदली हुई रणनीतिक सोच का नतीजा माना जा रहा है।
चीन के लिए क्यों चिंता का संकेत है यह कदम?
चीन लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि हिंद-प्रशांत रणनीति केवल अमेरिका की योजना है। लेकिन जब स्पेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे यूरोपीय देश भारत की पहल से जुड़ते हैं, तो यह तर्क कमजोर पड़ जाता है।
स्पेन की भागीदारी से हिंद महासागर में यूरोपीय नौसैनिक मौजूदगी और मजबूत होगी। इससे चीन पर यह स्पष्ट संदेश जाता है कि समुद्री दबाव की किसी भी रणनीति का जवाब अब केवल एक या दो देशों से नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ से मिलेगा।
बेल्ट एंड रोड के मुकाबले IPOI
जहां चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर छोटे देशों को कर्ज में फंसाने के आरोप लगते रहे हैं, वहीं IPOI बराबरी, पारदर्शिता और आपसी सम्मान पर आधारित मॉडल पेश करता है।
स्पेन का इससे जुड़ना यह साफ करता है कि दुनिया के कई देश अब प्रभुत्व की राजनीति के बजाय सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
समुद्र में भारत की बढ़ती भूमिका
स्पेन की भागीदारी से भारत की ‘सागर’ नीति को नई मजबूती मिली है। एक समय जिसे केवल एक विचार माना जा रहा था, वही IPOI अब ऑस्ट्रेलिया, जापान, फ्रांस, सिंगापुर और स्पेन जैसे देशों के साथ एक ठोस रणनीतिक मंच बन चुका है।
स्पेन की उन्नत नौसैनिक तकनीक और यूरोपीय यूनियन में उसकी मजबूत मौजूदगी भारत के लिए नए रणनीतिक और कूटनीतिक रास्ते खोल सकती है।
बदलती दुनिया में भारत का बढ़ता कद
स्पेन का IPOI में शामिल होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वैश्विक राजनीति में भारत का कद तेजी से बढ़ रहा है। अनिश्चित अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत अब एक ऐसा केंद्र बनता जा रहा है, जिसके इर्द-गिर्द नई वैश्विक साझेदारियां आकार ले रही हैं—समंदर से लेकर रणनीति तक।
