अब बच्चों की किताबों में क्या पढ़ाया जाएगा? सीएम के ऐलान से बदलेगा राजस्थान का सिलेबस

Rajasthan News: जयपुर। राजस्थान में स्कूली शिक्षा को अब इतिहास, संस्कार और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों में ‘वीर बाल दिवस’ से जुड़ी प्रेरक गाथा को शामिल करने का फैसला किया है। इस अध्याय में गुरु (Rajasthan News)गोविंद सिंह जी के साहिबजादे फतेह सिंह और जोरावर सिंह की शहादत को बच्चों के स्तर के अनुरूप सरल और प्रेरणादायक भाषा में प्रस्तुत किया जाएगा।

सीएम भजनलाल शर्मा का ऐलान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह घोषणा वीर बाल दिवस के अवसर पर बीजेपी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि बहुत कम उम्र में साहिबजादों ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।

सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित किए जाने के बाद यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि बच्चों को उनके त्याग और साहस से परिचित कराया जाए।

बचपन से संस्कार और राष्ट्रभक्ति का बीज

मुख्यमंत्री ने कहा, “माता गुजरी का त्याग और साहिबजादों का साहस हमें राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के प्रति अटूट संकल्प की प्रेरणा देता है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बच्चे बचपन से ही अपने इतिहास पर गर्व करना सीखें।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि पाठ्य पुस्तकों में यह अध्याय इस तरह शामिल किया जाएगा, जिससे बच्चों में साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति जैसे मूल्यों का स्वाभाविक विकास हो सके।

बीजेपी मुख्यालय में प्रदर्शनी का उद्घाटन

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीर बाल दिवस पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। इस मौके पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, सांसद मंजू शर्मा, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और विधायक बालमुकुंद आचार्य मौजूद रहे।

शहादत याद करते ही मन व्यथित हो उठता है

प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों की शहादत का स्मरण करते समय मन व्यथित हो उठता है।

मुगल काल में धर्म परिवर्तन के लिए दी गई यातनाओं के बावजूद साहिबजादों ने अपने धर्म से समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाया जाना पूरे देश के लिए गौरव का विषय है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समय की मांग है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमूह ने वीर साहिबजादों के अमर बलिदान को नमन किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version