Kalibai Bheel Scooty Yojana: राजस्थान सरकार की कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब सरकार पहले की तरह टेंडर प्रक्रिया के जरिए स्कूटी खरीदकर छात्राओं को वितरित नहीं करेगी बल्कि पात्र छात्राओं को ई-वाउचर या डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से राशि उपलब्ध कराई जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में दोनों प्रस्ताव (Kalibai Bheel Scooty Yojana)तैयार कर वित्त विभाग को भेज दिए हैं। मंजूरी मिलते ही नई व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मेधावी छात्राओं को अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार स्कूटी चुनने का अवसर मिलेगा। ई-वाउचर व्यवस्था में राजस्थान सरकार की ओर से जारी राशि का भुगतान अधिकृत डीलर को किया जाएगा और इसका उपयोग केवल स्कूटी खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा। वहीं डीबीटी व्यवस्था के तहत निर्धारित राशि सीधे छात्रा के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
टेंडर प्रक्रिया से मिलेगी राहत
अब तक उच्च शिक्षा विभाग टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से एक साथ बड़ी संख्या में स्कूटी खरीदता था और फिर पात्र छात्राओं को वितरित करता था। इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता था और छात्राओं के पास स्कूटी के विकल्प भी सीमित रहते थे। नई व्यवस्था लागू होने से टेंडर प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और छात्राओं को जल्द लाभ मिल सकेगा।
जानिए क्या है अंतर?
ई-वाउचर और डीबीटी दोनों व्यवस्थाओं में अंतर है। ई-वाउचर में राशि का उपयोग केवल स्कूटी खरीदने के लिए किया जा सकेगा और भुगतान सीधे अधिकृत डीलर को होगा। जबकि डीबीटी के तहत राशि छात्रा के खाते में जमा होगी और वह नियमानुसार इसका उपयोग कर सकेगी।
छात्राओं को मिलेगा पसंद का विकल्प
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि छात्राएं अपनी पसंद के मॉडल और ब्रांड की स्कूटी खरीद सकेंगी। इससे उन्हें उपलब्ध विकल्पों में से चयन करने की स्वतंत्रता मिलेगी और वितरण प्रक्रिया में होने वाली देरी भी कम होगी। इस सत्र के लिए कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना की वरीयता सूची पहले ही जारी की जा चुकी है। अब वित्त विभाग से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद पात्र छात्राओं को नई व्यवस्था के अनुसार लाभ दिया जाएगा।
स्कूटी योजना के लिए ई-वाउचर और डीबीटी के दो प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए हैं। अनुमति मिलते ही आगे की प्रक्रिया पूरी कर छात्राओं को लाभ दिया जाएगा। नथमल डिडेल, आयुक्त, कॉलेज शिक्षा विभाग
