Pannadhay Bal Gopal Yojana: जयपुर। जिन सरकारी स्कूलों के मासूम बच्चों के पोषण के लिए भेजा गया दूध पाउडर उनके गिलास तक पहुंचना था, वह कथित तौर पर मावा बनाने वाली भट्टियों की ओर जा रहा था। जयपुर ग्रामीण पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई में करीब 3 हजार किलो सरकारी दूध पाउडर से भरा वाहन पकड़ा गया है। इस खुलासे ने पन्नाधाय बाल गोपाल योजना की सप्लाई चेन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।(Pannadhay Bal Gopal Yojana) हैरानी की बात यह है कि एक ओर कई जिलों के स्कूल दूध पाउडर नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वही सरकारी स्टॉक कथित तौर पर अवैध तरीके से बाजार में खपाया जा रहा था।
बच्चों के हक का दूध भट्टियों तक कैसे पहुंचा?
सामोद थाना क्षेत्र के चीथवाड़ी स्थित गोलाडा की ढाणी में पुलिस और डीएसटी टीम ने कार्रवाई करते हुए सरकारी दूध पाउडर से भरी पिकअप जब्त की। वाहन से करीब 3 हजार किलो दूध पाउडर बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि यह दूध पाउडर सरकारी स्कूलों में वितरण के बजाय मावा बनाने वाली फैक्ट्रियों तक पहुंचाया जा रहा था। पुलिस ने चालक समेत तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
स्कूलों में नहीं पहुंचा दूध, बाजार में मिला सरकारी स्टॉक
मिड-डे मील योजना आयुक्तालय पहले ही कई जिलों में दूध पाउडर की कमी को लेकर राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (आरसीडीएफ) को आपूर्ति तेज करने के निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद कई स्कूलों में अप्रैल के बाद से बच्चों को दूध नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सरकारी दूध पाउडर का कथित तौर पर बाजार में पकड़ा जाना पूरे वितरण तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है।
अब पूरे नेटवर्क की होगी जांच
पुलिस के अनुसार, जब्त दूध पाउडर श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा और जयपुर डेयरी का है। सरकारी दूध पाउडर की खुले बाजार में बिक्री प्रतिबंधित है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। पूछताछ के आधार पर सप्लाई चेन से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
क्या है पन्नाधाय बाल गोपाल योजना?
इस योजना के तहत राजस्थान के करीब 50 लाख प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को पोषण के लिए दूध उपलब्ध कराया जाता है। कक्षा 1 से 5 के विद्यार्थियों के लिए 15 ग्राम दूध पाउडर से 150 मिलीलीटर और कक्षा 6 से 8 के लिए 20 ग्राम दूध पाउडर से 200 मिलीलीटर दूध तैयार किया जाता है। इसकी डोर-स्टेप आपूर्ति राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) के माध्यम से स्कूलों तक की जाती है।
